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Thursday, July 18, 2024

कागजों में बेहतर, हकीकत कुछ और

32 प्राथमिक विद्यालय शिक्षक के अभाव में बंद

शिक्षक बढ़े, संसाधन बढ़ा फिर भी नहीं नहीं सुधरी स्कूलों की दशा

जागरण संवाददाता, बस्ती : सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की तस्वीर बदहाल है। कहीं शिक्षक नहीं हैं तो कहीं शिक्षा मित्र स्कूल चला रहे हैं। कहीं पर सब कुछ है तो माहौल नहीं है और न ही छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा ही दी जा रही।

जिले में परिषदीय स्कूलों में शैक्षणिक माहौल पैदा करने, गुणवत्ता सुधारने और बच्चों का झुकाव पैदा करने के लिए यूनिफार्म, पाठ्य पुस्तकें और दोपहर का भोजन दिया जा रहा है। इस पर हर माह करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाया जा रहा है बावजूद इसके स्कूलों में न तो छात्रों की संख्या बढ़ रही है और न ही अभिभावकों का विश्वास ही।

जिले में 1550 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय है, जिसमें कक्षा एक से पांच तक के 191429 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। करीब 32 प्राथमिक विद्यालय शिक्षक के अभाव में बंद हैं तो 230 ऐसे विद्यालय हैं, जिसे शिक्षा मित्र चला रहे हैं। 496 प्राथमिक विद्यालय एक अध्यापक वाले हैं। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में एक से पांच तक के छात्रों को शिक्षक कैसे सारे विषय पढ़ाता होगा और कितनी ईमानदारी से अपने दायित्वों का निर्वहन करता होगा यह एक सोचनीय सवाल है। परिषदीय स्कूलों में 2710 शिक्षा मित्रों सहित शिक्षकों की कुल संख्या 4970 है।

इसी तरह से परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 631 है, जिसमें कुल छात्रों की संख्या 49357 है। शिक्षक के अभाव में 36 स्कूल बंद हैं जबकि 148 एकल शिक्षक वाले हैं।

जिले में परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है पर नए सत्र में यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। रही बात स्कूलों में छात्रों की तो यह संख्या बढ़ रही है। एक बार फिर परिषदीय प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल में शैक्षणिक गुणवत्ता और माहौल में तेजी से सुधार आ रहा है।

एमआर राजभर, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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