तारे ज़मीं पर ई-कैम्प फायर

वर्तमान परिस्थितियों में लोगों को अवसादग्रस्त होने से बचाने के लिए एक विशेष संगीत संध्या का आयोजन

सी टी सी एस, अंजली फ़िल्म प्रोडक्शन एवं यूथ हॉस्टल्स का संयुक्त प्रयास

ई-कैम्प फायर संगीत संध्या वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर

लखनऊ/बलरामपुर: वर्तमान परिस्थितियों में लोगों को अवसादग्रस्त होने से बचाने के लिए एक विशेष संगीत संध्या का आयोजन रात 7 बजे से गूगल मीट वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर किया गया।

कार्यक्रम का आगाज़ वाराणसी की बाल कलाकार प्रदन्या दूबे ने शिव स्तुति (आशुतोष शशांक शेखर) की प्रस्तुति से किया। डॉ. रीतू यादव ने दिल्ली से राधिका गोरी से ब्रज की छोरी से भजन सुनाया। इसके बाद लखनऊ से डी. के. श्रीवास्तव ने माउथ ऑर्गन पर गाना सुनाया, अंजड़ (मध्यप्रदेश) से निक्की ठाकुर ने आने से उसके आई बहार, लखनऊ से अनुष्का पांडे ने अगर तुम साथ हो तो, बृजेन्द्र बहादुर मौर्या ने दिल के टुकड़े टुकड़े करके, ज्योती खरे ने ऐ दिल मुझे बता दे, सतीश दलेला सर ने चाँद सी महबूबा हो मेरी, बाराबंकी से अमन जावेद फ़ारूक़ी ने दीवाना हुआ बादल, लखनऊ से आन्या मदार ने फ़ज़ा भी है जवां जवां, बलरामपुर से रीतू शर्मा ने ये समा-समा है ये प्यार का, सी. टी. सी. एस. के बचपन कार्यक्रम की ब्राण्ड एम्बेसडर 5 वर्ष की सोनाली श्रीवास्तव ने एक संस्कृत श्लोक व कविता मैं बेटी हूँ मुझे आने दो सुनाई।

कार्यक्रम को गति देते हुए दिल्ली से विनीता सक्सेना ने रेशमी उजाला है, बाराबंकी की ऐमन जावेद फ़ारूक़ी ने अपनी सुमधुर आवाज़ में होठों में ऐसी बात, अदिति वर्मा ने मेरी भीगी भीगी सी (इसी गाने के बीच में इसके बांग्ला वर्ज़न सहित), लखनऊ की बाल गायिका बानी चावला ने आसमानों पे जो ख़ुदा है, से चार चांद लगा दिए।

इस समय तक सभी श्रोता कार्यक्रम में पूर्णरूपेण मग्न हो चुके थे और इस महफ़िल को रौशन करने के लिए लखनऊ से ही केशव प्रसाद वर्मा ने पल पल दिल के पास सुनाया। इसके बाद बारी आई आशू कांति सिन्हा की जिन्होंने बांसुरी की धुन की ऐसी तान छेड़ी अपने नगमे पंख होते तो उड़ जाती रे रसिया ओ बालमा, से कि सब भावविभोर हो गए। स्वरा त्रिपाठी ने सारे के सारे गामा को लेकर, यामिनी शर्मा ने तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है सुनाया, नंदिनी खरे ने तूने ओ रंगीले कैसा जादू किया, बलरामपुर के आनंद किशोर ने ज़िंदगी एक सफर है सुहाना, लखनऊ से डी. के. श्रीवास्तव ने हुस्न वाले तेरा ज़वाब नहीं, बलरामपुर से जितेंद्र गुप्ता ने जाने कहाँ गए वो दिन, लखनऊ से आकर्ष सिंह सूर्यवंशी ने ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा सुनाया।

इस कार्यक्रम का कॉन्सेप्ट एवं इसकी शानदार एंकरिंग बलरामपुर से आलोक अग्रवाल ने बहुत खूबसूरत अंदाज़ में करते हुए सभी को लगातार बांधे रखा और महफ़िल को कभी भी रोचकता से परे नहीं जाने दिया। कार्यक्रम का आनंद सी. टी. सी. एस. के फाउंडर मनोज कुमार, अंजली फ़िल्म प्रोडक्शन की अंजली पांडेय सहित सी. टी. सी. एस. से अर्चना पाल, निधि श्रीवास्तव, संदीप उपाध्याय, रूपा लेलितिया एवं इंदौर से वृन्दा पाठक सहित तमाम परिजनों ने लगातार तीन घंटों से भी ज्यादा समय तक उठाया। कार्यक्रम में कुल मिलाकर 26 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ पेश की। डी. के. श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की समाप्ति के पूर्व उपस्थित सभी श्रोताओं और कलाकारों से यह भी कहा कि – कुल मिलाकर इतना ही कह सकते हैं कि टीवी का स्क्रीन चांद तारों से भरा हुआ आसमान हो गया था और तारे जमीन पर उतर आए थे। सभी श्रोता कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए मना कर रहे थे, परंतु समय का ध्यान देते हुए समाप्त तो करना ही था। यह वादा किया गया कि प्रत्येक माह इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता रहेगा और नए-नए गायकों को इसमें शामिल करते हुए उन्हें भी यह खूबसूरत मौका दिया जाएगा।

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