दोहरी हत्या के बाद हत्यारा सीतापुर का अंशु दीक्षित भी इनकाउंटर में मारा गया

हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर घटी घटना पर मुख्यमंत्री गंभीर, बुलाई अधिकारियों की बैठक

सीतापुर -अनूप पाण्डेय,कृष्ण मोहन मिश्रा “राहुल”

सीतापुर। यूपी की हाई सिक्योरिटी जेल चित्रकूट जिला कारागार के अंदर में आज दिन में हुए शूट आउट में एनआईए अधिकारी तंजील अहमद की हत्या में शामिल पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात अपराधी मुकीम काला व एक अन्य अपराधी मेराजुद्दीन मारा गया जबकि बाद में इन दोनों की हत्या करने वाले शातिर अपराधी अंशुल दीक्षित को पुलिस ने मार गिराया। जेल के अंदर गैंगवार, फायरिंग व दोहरी हत्या से हड़कंप मच गया है तथा जिले के लगभग सभी बड़े पुलिस अधिकारी व कई थानों की पुलिस जेल के अंदर मौजूद है। यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत पांडेय ने जेल के दो हत्याओं व बाद में हत्यारे बदमाश के एनकाउंटर में मारे जाने की पुष्टि की है।
चत्रकूट जेल के अंदर दो हत्याओं और बदमाश के इनकाउंटर की घटनाको मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें अपर मुख्य सचिव/गृह अवनीश अवस्थी व पुलिस विभाग के बड़े अधिकारी शामिल हैं, खबर लिखे जाने तक बैठक जारी थी। मारे गए मुकीम उर्फ काला व मेराजुद्दीन की हत्या करने वाला अंशु दीक्षित भी पश्चिमी यूपी का गैंगेस्टर बताया गया है, वहीं मारे गए दोनों बदमाश बाहुबली मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे बताए जा रहे हैं। मेराजुद्दीन को हाल ही में बनारस जेल से चित्रकूट जेल भेजा गया था, जबकि मुकीम काला सहारनपुर जेल से लाया गया था। घटना की सूचना पर जेल के अंदर पहुंची पुलिस ने अंशुल दीक्षित को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह लगातार फायरिंग करता रहा। बाद में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अंशु भी मारा गया। मारे गए अंशु के पास पिस्टल बरामद हुई है।
एनआईए अधिकारी तंजील की थी हत्या…..
अभी तक मिली खबर के अनुसार अंशु दीक्षित ने सुबह परेड के बाद अपने साथ बंद कैदी मेराजुद्दीन और मुकीम उर्फ काला पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी, हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी। इसके बाद अंशु जेल के भीतर ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगा, करीब आधे घंटे तक जेल कर्मी खौफ में उसके करीब नहीं गए। जब और फोर्स पहुंची तो सिपाहियों ने अंशु दीक्षित की घेराबंदी कर सरेंडर करने के लिए कहा। लेकिन वह पुलिसवालों पर फायरिंग करता रहा। जवाबी कार्रवाई कर पुलिस ने अंशुल दीक्षित को गोली मारकर ढेर कर दिया।जेल को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। जेल की सुरक्षा में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगी ? इस पर अभी अधिकारी कुछ नहीं बोल रहे हैं वे जांच के बाद कार्रवाई की बात कर रहे हैं। अंशु दीक्षित के पास पिस्टल कहां से आई ? यह एक बड़ा सवाल है। वहीं जेल सुपरिटेंडेंट एसपी त्रिपाठी ने माना है कि किसी जेल कर्मी की मिलीभगत से ही जेल के अंदर पिस्टल पहुंची।
लखनऊ विवि का छात्र रहा है अंशु दीक्षित…..
यह भी कहा जा रहा रहा है कि गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने मुकीम उर्फ काला को मारने की सुपारी ली थी और इसे ही अंजाम देने के लिए उसने सेटिंग से चित्रकूट जेल में अपना ट्रांसफर करवाया था। सीतापुर जिले के मानकपुर कुड़रा बनी का मूल निवासी अंशु दीक्षित लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र के रूप दाखिला लेने के बाद अपराधियों के संपर्क में आया। वर्ष 2008 में वह गोपालगंज (बिहार) में अवैध असलहों के साथ पकड़ा गया था। अंशु दीक्षित का असलहे के साथ 2019 में सुल्तानपुर जेल के अंदर का वीडियो वायरल होने के बाद उसे चित्रकूट जेल भेजा गया था। घटना की जांच और स्थिति का जायजा लेने के लिए प्रभारी उप महानिरीक्षक कारागार (प्रयागराज) रेंज, पी एन पांडे चित्रकूट रवाना हो चुके हैं।
मुकीम ने लखनऊ में होटल मैनेजर की थी हत्या…
बता दें कि जेल में मारा गया मुकीम काला वही अपराधी है जिसने एनआईए ऑफिसर तंजील अहमद को दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया था। ये वही अपराधी है जिसने तंजील अहमद को मारने से पहले प्रैक्टिस के तौर पर लखनऊ में निर्दोष होटल मैनेजर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। ये पश्चिम उत्तर प्रदेश का खूंखार अपराधी था, इसने बहुतों के घर उजाड़े हैं। कैराना समेत आसपास के इलाकों में आतंक का पर्याय बना कुख्यात मुकीम उर्फ काला 6 साल पहले अन्य मजदूरों के साथ मकान निर्माण में चि‍नाई मिस्त्री के साथ मजदूरी करता था। मुकीम काला ने पहली वारदात हरियाणा के पानीपत में एक मकान में डकैती के रूप में अंजाम दी। इस मामले में मुकीम काला जेल गया था उसके बाद उसने अपराध की दुनिया में अपने कदम आगे बढ़ा दिए।
राजमिस्त्री रहे मुकीम पर 61 मामले दर्ज हैं…..
मुकीम काला का खौफ पश्चिमी यूपी के अलावा हरियाणा के पानीपत और उत्तराखंड के देहरादून में भी फैला था। मुकीम का गैंग पुलिस के रडार पर तब आया जब इन्होने पुलिस पर भी हमले करने शुरू कर दिए। पुलिस के अनुसार, दिसबंर 2011 में पुलिस एनकाउंटर में मुस्तफा उर्फ कग्गा मारा गया जिसके बाद मुस्तकीम काला ने कग्गा के गैंग की बागडोर संभाल कर वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। मुकीम काला के गैंग में डेढ़ दर्जन से अधिक बदमाश शामिल रहे और उन्होंने ताबड़ोड़ दो वर्षों में ही हत्या, लूट, रंगदारी समेत कई जघन्य वारदातों को अंजाम दिया। मुकीम काला पर यूपी, उत्तराखंड व हरियाणा में 61मामले दर्ज हैं।
एसटीएफ पर भी गोलियां चलाईं थीं अंशु ने…..
बाहुबली मुख्तार अंसारी के खास व शार्प शूटर सीतापुर के रहने वाले मप्र और उप्र एसटीएफ पर भी 27 अक्तूबर को गोलियां चलाई थीं। दिसंबर 2014 में इसे पकड़ा गया था। चित्रकूट जेल आधुनिक होने से इसे यहां करीब दो साल पहले भेजा गया था।
मेराजुद्दीन पहले मुन्ना बजरंगी का खास था. . . . .
जेल के अंदर मारा गया दूसरा बदमाश मेराजुद्दीन वाराणसी का रहने वाला था और पहले मुन्ना बजरंगी का खास था, फिर मुख्तार से जुड़ा। इसकी अंशु दीक्षित से तनातनी रहती थी। मुकीम काला का भाई वसीम काला एसटीएफ के हाथों में मुठभेड़ में मारा जा चुका है। सहारनपुर में वर्ष 2015 में तनिष्क ज्वैलरी शोरूम में डकैती कांड को अंजाम दिया था। गिरोह पर दर्जनों लूट, हत्या व मुठभेड़ के मुकदमे दर्ज हैं।

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