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Monday, July 15, 2024

पुलिस शिकायत प्राधिकरण को है ‘शिकायत’

13_05_2013-uttarakhadlogo

देहरादून –  प्रदेश सरकार ने छह वर्ष पहले बड़े ही जोर शोर के साथ राज्य पुलिस प्राधिकरण का गठन किया। मंशा यह कि आमजन की समस्याओं की अनसुनी करने वाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाया जा सके। मगर अफसोस, शासन व विभाग की ओर से प्राधिकरण को गंभीरता से लिया ही नहीं गया। प्राधिकरण की संस्तुति पर गिनती के मामलों में ही कार्यवाही की गई। यही नहीं, प्राधिकरण को इस संबंध में सूचना भी नहीं दी जा रही है।

राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण का का गठन पुलिस की ओर से गंभीर प्रकार के दु‌र्व्यवहार की शिकायतों का निस्तारण करने के लिए किया गया है। इसके गठन के बाद से ही पुलिस उत्पीड़न से परेशान आमजन ने प्राधिकरण में शिकायतें दर्ज करानी शुरू की। शुरूआत में शिकायतों की संख्या कुछ कम थी लेकिन फिर धीरे-धीरे कर यह मामले बढ़ने लगे। प्राधिकरण ने भी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दोषी अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति करनी शुरू की। शुरूआत में यह संस्तुतियां शासन के गृह विभाग को भेजी गई। शासन ने भी इन मामलों को गंभीरता से नहीं लिया। शासन ने प्राधिकरण की संस्तुतियों पर कार्यवाही के नाम पर अधिकारियों को चेतावनी दे कर इतिश्री कर ली। कुछ समय बाद जब संस्तुतियों में बढ़ोत्तरी हुई तो इन पर कार्यवाही के लिए पुलिस मुख्यालय को भेजा जाने लगा। तर्क दिया गया कि चूंकि शासन के जरिए केवल आइपीएस व पीपीएस के मसलों पर ही सुनवाई होती है। ऐसे में मुख्यालय अपने स्तर से इन मामलों को देखे। अब शिकायत प्राधिकरण की संस्तुतियां मुख्यालय स्तर पर देखी जाती हैं। पुलिस का दावा है कि जिन संस्तुतियों को सही पाया जाता है उन पर नियमानुसार कार्यवाही होती है। हालांकि, कार्यवाही कितनों पर की गई इसका पूरा ब्योरा मुख्यालय में अभी नहीं है। इतना ही नहीं शासन स्तर पर भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की संस्तुति अभी फाइलों में ही धूल फांक रही है।

‘प्राधिकरण शिकायत की सत्यता जांच कर अपनी संस्तुति शासन को भेजता है। इस पर एक्शन लेने का कार्य गृह विभाग का है। प्राधिकरण को कार्यवाही के संबंध में कोई सूचना नहीं मिलती।’ अंजनी कुमार, अध्यक्ष राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण

‘राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण की संस्तुतियों पर कार्यवाही होती है लेकिन यह देखा जाता है कि संस्तुतियां कितनी तार्किक हैं।’ सत्यव्रत, डीजीपी

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