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Monday, July 15, 2024

प्रदूषण से निपटने के लिए सीपीसीबी व दिल्ली, एनसीआर के राज्य बनाए समग्र योजना

सुप्रीमकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से प्रदूषण करने वाले ईंधन फर्नेस आयल और पेटकोक पर प्रतिबंध लगाने को कहा। इसके साथ ही कोर्ट ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली , यूपी, हरियाणा और राजस्थान सरकार से कहा है कि वे बैठक करके प्रदूषण की रोकथाम की समग्र योजना तैयार करें।

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर व न्यायमूर्ति पीसी पंत की पीठ ने दिल्ली में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली में हर साल प्रदूषण जनित बीमारियों से 3000 लोग मरते है। सरकार को इस समस्या से निबटने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिये। कोर्ट ने फर्नेस आयल और पेटकोक जैसे प्रदूषित ईंधनों पर रोक लगाने का जल्दी फैसला न करने पर केन्द्र सरकार को आड़े हाथ लिया। पीठ ने कहा कि इन ईंधनों में सल्फर बहुत ज्यादा है जो कि प्रदूषण करता है।

कोर्ट ने केन्द्र सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वह संबंधित पक्षों के साथ विचार विमर्श कर फर्नेस आयल व पेटरकोक पर प्रतिबंध लगायें और उसका दूसरा विकल्प ढूंढे़। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने फर्नेस आयल और पेटकोक पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए कहा कि प्रदूषण में ईधन की गुणवत्ता का महती योगदान होता है। फर्नेस आयल और पेटकोक में अन्य स्वीकार ईंधनों की तुलना में कई गुना ज्यादा सल्फर होता है जो कि प्रदूषण फैलाता है।

पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सालिसीटर जनरल रंजीत कुमार से कहा कि वे इस पर प्रतिबंध लगाने के उपाय करें। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए एक समग्र योजना होनी चाहिए अभी अलग अलग अथारिटीज की अलग अलग योजनाएं होती हैं उनके बीच समन्वय की कमी होती है। इस सबको देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अथारिटी (ईपीसीए), सीपीसीबी, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय, दिल्ली सरकार और एनसीआर के राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान मिल कर बैठक करें और प्रदूषण नियंत्रण की समग्र योजना तैयार करें।

इससे पहले इपीसीए ने फर्नेस आयल और पेटकोक जैसे प्रदूषित ईंधनों पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि फर्नेस आयल रिफायनरी का सबसे निम्न स्तर का उत्पाद होता है और पेटकोक रिफायनरी का बाई प्रोडेक्ट होता है ये बहुत ही प्रदूषित ईंधन हैं। ईपीसीए का कहना था कि उसकी जांच में पता चला है कि दिल्ली और एनसीआर में बड़ी मात्रा में फर्नेस आयल और पेटकोक बिकता है।

कोर्ट ने सीपीसीबी को इन्वायरमेंट कम्पनशेटरी चार्ज (ईसीसी) की एकत्रित रकम से 2.50 करोड़ निकालने की इजाजत दे दी है। लेकिन कोर्ट ने सीपीसीबी से कहा है कि वह ये रकम दिल्ली एनसीआर में रियल टाइम मानीटरिंग स्टेशन बनाए जाने के उपकरण खरीदने पर ही खर्च करेगा। कोर्ट ने ईपीसीए से कहा है कि वह एनसीआर के भी पीयूसी सेन्टरों (वाहनों में प्रदूषण की जांच करने वाले केंद्र) की जांच करे।

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