भ्रष्टाचार की जांच में केवल हुई खानापूर्ति लाभार्थी दर-दर भटकने पर मजबूर।


सीतापुर-अनूप पाण्डेय/NOI-उत्तरप्रदेश जनपद सीतापुर भाजपा सरकार बनते ही सूबे के मुखिया योगी आदित्य नाथ ने भ्रष्टाचार खत्म करने की प्रमुख बात कही थी  मगर भ्रष्टाचार और बढ़ता गया भ्रष्टाचार की जड़े इतनी बजबूत है कि शिकायत करता जब तक मजबूर होकर थक हार कर घर न बैठ जाये तब तक केवल कागजों की खानापूर्ति की जाती रहती है ।
ताजा मामला सीतापुर जनपद के महमूदाबाद ब्लॉक रजपारा का है जहां पर  जोगराज वर्मा, जो कि कच्ची दीवाल पे छप्पर डाल कर रहता है उसे प्रधान मंत्री आवास नही दिया गया उसका आवास यह कह कर प्रधान ने कटा दिया कि गरीब था वोह प्रधान को मोटी रकम नही दे सका ग्राम सचिव ने दिख दिया कि गांव में ही नही रहता दूसरी बार जब शिकायत की तो उसे मौके पे न उपस्थित दिखाकर सचिव ने आख्या लगा दी।

ऐसे तो कई लाभर्थियों ने बताया जैसे लाल मुहम्मद ,शिराज,रेशमा, अस्ना, मगरू, शतीश, केशव,रुखतान, मोम्मद रजा आदि लाभार्थियों ने ग्राम प्रधान जमकर धन उगाही का आरोप लगाते हुए जिला अधिकारी को सपथ पत्र के साथ शिकायत की मगर कोई भी जांच नही हुई   लाभार्थियों ने बताया कि ग्राम पंचायत में जो भी प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास दिए गए हैं उनमें 40 हजार  रुपये लिया गया है कुछ लोगों को जिन्होंने कम रुपया दिया है  उनका आवास  कटा दिया गया सबसे बड़ा मामला बड़ा तब आया जो सौचालय बने है उनपे डबल यूनिक आईडी डाल कर रूपयों का बन्दर बाट हो गया कुछ लोगो को पता ही नही  नो प्रधान मंत्री आवास दिए गए है वह अधिकतर में जो धनवान हैं उन्हीं को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास दिया गया और तो और लाभार्थियों को स्वच्छ भारत मिशन तहत जो शौचालय मिले हैं उनमें लाभार्थियों को बिना बताए उसका पैसे का भुगतान करा लिया गया जब लाभार्थियों को सूचना मिली तो पता चला किया तो 3 वर्ष हो गए और शौचालय का पैसा निकल चुका है मगर जब लाभार्थियों ने जानकारी ली जिसके बाद शिकायत किया तो फर्जी निस्तारण कर शिकायतकर्ता को केवल खानापूर्ति कर कागज पकड़ा दिया गया इस ग्राम पंचायत में इस प्रकार भ्रष्टाचार फैला हुआ है कि पूरा गांव  भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन गया है अगर सही तरीके से जांच एजेंसी से जांच कराई जाए तो सभी सच्चाई आंखों के सामने आ जाएंगे मगर जिले के जिलाधिकारी तक शिकायत के बावजूद जांच कराना मुनासिब नहीं समझा।।

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