ये कावड़ियों का कृत्य है या ???

दीपक ठाकुर:NOI।

सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना जाता है इस महीने हर सोमवार को मंदिरों में शिवभक्तों का ताँता दिखाई पड़ता है इसी क्रम में मानता ये भी है कि जो सावन के महीने में देवघर जा कर शिव की पूजा अर्चना करते हैं उन पर भगवान की विशेष कृपा बरसती है मतलब वो जिस मनोकामना के साथ जाते है वो पूरी ज़रूर होती है।

आपने भी देखा और सुना होगा कि आजकल कांधे पे कांवड़ उठाये कांवड़िये बोल बम के जय घोष के साथ एक हुजूम में चलते हुए दिखाई देते हैं जिनकी मंज़िल शिव धाम ही होती है इस लम्बे सफर में वो वैसे तो अपने लिए सभी इंतज़ाम कर के चलते हैं लेकिन शासन प्रशासन भी जगह जगह उनको कई प्रकार की सुविधाएं देता रहता है ताकि उनकी यात्रा बाधा रहित वा सुगम हो सके।

लेकिन आजकल जो तस्वीर कांवड़ियों की देखी जा रही है उसने लोगो के मन मे उनके प्रति दहशत भर दी है कांवड़ियों की उदंडता का जो चित्र न्यूज़ चैनलों पर दिखाया जा रहा है उससे यही लगता है कि उनके लिए शिव भक्ति तो एक बहाना है उनका मकसद तो लोगों को कष्ट पहुंचाना है।

पर यहां भी संदेह इस बात को लेकर है कि क्या ऐसा करने वाले वास्तव में कांवड़िये ही हैं या उनके भेष में कोई और है जो उन्हें बदनाम करने की साजिश कर रहा है।इस तरह की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी सख्त हुआ है जिससे उम्मीद यही की जानी चाहिए कि पवित्र यात्रा का संकल्प ले कर अपने घरों से निकलने वाले असल कांवड़ियों को आगे कोई दिक्कत नही आएगी और जो उनके नाम पर खेल खेलने की कोशिश कर रहे हैं उनकी खैर भी अब नही रह पाएगी।बोल बम का उदघोष करने वाली कांवड़ यात्रा से ऐसे उत्पात की उम्मीद लगाना भी गलत लगता है

अगर ऐसी तस्वीरें ना सामने आती पर सच दिखना चाहिए ये बेहद ज़रूरी है जो शायद अब सबके सामने होगा और कांवड़ यात्रा से लोगो के दहशत का भी अंत होगा।

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