वाराणसी। अखिलेश यादव से नाराज शिवपाल सिंह यादव ने सेक्यूलर मोर्चे का गठन कर सपा के लिए मुश्किल बढ़ा दिया है। शिवपाल सिंह यादव की नजर में कई बाहुबलियों और पुराने राजनीतिक खिलाड़ियों के लिए शिवपाल सिंह यादव ने नया रास्ता खोल दिया है। जिन बाहुबलियों को सपा और भाजपा दोनों टिकट देने से कतरा रहे थे उनके लिए ये एक बड़ा मौका हो सकता है। वहीं बाहुबली अतीक अहमद के बेटे ने यह साफ कर दिया है कि अगर शिवपाल सिंह यादव का सेक्यूलर मोर्चा कायम होता है तो बाहुबली अतीक अहमद शिवपाल सिंह यादव के सेक्युलर मोर्चे का चेहरा होंगे।

पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे मोहम्मद उमर ने यह बयान दिया है कि अगर सम्मान मिला तो शिवपाल सिंह यादव की सेक्यूलर मोर्चे में जरूर शामिल होंगे। कहा कि अब तक हमें वोट बैंक के लिए इस्तेमाल किया गया। सरकार ने हमारे नाम पर वोट लिया। लेकिन जब हम पर फर्जी मुकदमें लिखाए गये तो कोई साथ नही आया। ऐसे में हमारे पास विकल्प खुले हैं, हमें सम्मान के साथ अपनी शर्तो पर नये विकल्प से राजनीति करने में कोई गुरेज नहीं है। बीते विधान सभा में शिवपाल जी ने टिकट दिया था। फिर मौका मिला तो हम उनके साथ हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव का नाम लिए बिना उमर ने कहा कि हमें उन लोगों के साथ नहीं खड़ा होना चाहते जिन्होंने हमे हमारे हक से महरूम किया। उमर ने कहा हमारे वालिद पांच बार विधायक रहे हैं। वो देश की बड़ी सीट से सांसद चुने गये। जनता के नेता हैं। आम आदमी, गरीब, मजलूम के हक के लिए जो हमारी मदद मांगेगा हम उसके साथ हैं। लेकिन अब अपना इस्तेमाल नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि अभी सेक्युलर मोर्चा पूरी तरह से कायम नहीं हुआ है। लेकिन अगर मोर्चा कायम होता है तो हम जनता की सेवा करने से पीछे नहीं रहेंगे।

बतादें कि गठन के बाद शिवपाल यादव ने खुलकर कहा कि सपा से उपेक्षित लोगों को सेक्युलर मोर्चे से जोड़ा जाएगा। सेक्युलर मोर्चा यूपी में राजनीति का नया विकल्प होगा। उन्होंने कहा कि सेक्युलर मोर्चे के सहारे वह छोटे-छोटे दलों को जोड़ेंगे। शिवपाल ने कहा कि वह नेताजी को सम्मान न मिलने से आहत हैं। उन लोगों को सपा की किसी भी मीटिंग में नहीं बुलाया जाता।

बतादें कि शिवपाल के विश्वस्त्र सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक देवरिया जेल में बंद अतीक अहमद भी शिवपाल के सेक्युलर मोर्चे में शामिल होने की बात आ रही है। माना जा रहा है कि सपा से मिली नाराजगी के बाद और भाजपा सरकार में लगातार बढ़ते दबाव के बीच अतीक अहमद आने वाले समय में शिवपाल के लिए बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में काम कर सकते हैं।

कौन है अतीक अहमद
अतीक अहमद का जन्म 10 अगस्त 1962 को हुआ था. मूलत वह उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद के रहने वाले है. पढ़ाई लिखाई में उनकी कोई खास रूचि नहीं थी। इसलिये उन्होंने हाई स्कूल में फेल हो जाने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। कई माफियाओं की तरह ही अतीक अहमद ने भी जुर्म की दुनिया से सियासत की दुनिया का रुख किया था। पूर्वांचल और इलाहाबाद में सरकारी ठेकेदारी, खनन और उगाही के कई मामलों में उनका नाम आया।

राजनीति में पहला कदम
अपराध की दुनिया में नाम कमा चुके अतीक अहमद को समझ आ चुका था कि सत्ता की ताकत कितनी अहम होती है. इसके बाद अतीक ने राजनीति का रुख कर लिया. वर्ष 1989 में पहली बार इलाहाबाद (पश्चिमी) विधानसभा सीट से विधायक बने अतीक अहमद ने 1991 और 1993 का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और विधायक भी बने. 1996 में इसी सीट पर अतीक को समाजवादी पार्टी ने टिकट दिया और वह फिर से विधायक चुने गए।

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