चुनाव से ठीक पहले भाजपा पर आया बड़ा संकट, मोदी सरकार खतरे में

पिछले कुछ समय से यदि राजनीतिक पार्टियों को चुनावी नजरिए से देखें तो उसमें यह स्पष्ट नजर आता है कि पिछले तकरीबन 3 माह भारतीय जनता पार्टी के लिए बिल्कुल भी ठीक तरीके से नहीं गए हैं। गौरतलब है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हालांकि हाल ही में भाजपा पर एक अन्य बड़ा आरोप लगा है, जिसके चलते अब भाजपा को चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा झटका लगा है। और यही नहीं मोदी सरकार पर भी खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि अब पूरे देश की निगाहें मोदी सरकार पर ही टिकी हैं।

बताते चलें कि हाल ही में भारत में भगोड़ा घोषित विजय माल्या ने मीडिया को दिए गए एक बयान में कहा था कि वह देश छोड़ने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिले थे। हालांकि कुछ समय पश्चात विजय माल्या अपने इस बयान से मुकर गए और उन्होंने मीडिया के सामने यह तर्क दिया कि उन्होंने इस प्रकार का कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया है। मीडिया उनके इस बयान को तोड़-मरोड़ कर दिखा रही है। हालांकि विजय माल्या तब तक काफी देर कर चुके थे तथा भारत में यह खबर काफी तेजी से तूल पकड़ता नजर आ रही है।

अब ऐसे में विपक्ष में मौजूद कांग्रेस फिलहाल कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। बताते चलें कि गुरुवार को राहुल गांधी ने पहले तो प्रधानमंत्री मोदी से अपील की कि वह इस मामले की जांच कराएं। लेकिन थोड़ी देर के बाद उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की मिलीभगत तक की बात कह डाली। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य कांग्रेस प्रवक्ता सहित अनेक विपक्षी पार्टियां वर्तमान समय में भागने से पहले विजय माल्या और अरुण जेटली की मुलाकात को लेकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि अरुण जेटली यह स्पष्ट कर चुके हैं कि विजय माल्या और उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई है।

हालांकि कांग्रेस ने जिस रफ्तार से इस मामले को मीडिया सहित पूरे देश में उछाला है उसे यह लगता है कि आने वाले कुछ ही दिनों में इस मामले की पूरी कलई खुल जाएगी। जिसके पश्चात यदि यह मामला सही साबित हुआ तो अरुण जेटली की कुर्सी के साथ-साथ भाजपा पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। क्योंकि जल्द ही चुनाव आने वाले हैं। और इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी पहले ही एससी एसटी एक्ट को लेकर सवर्ण समाज की नाराजगी झेल चुकी है। अब ऐसे में देखना यह होगा कि मोदी सरकार कौन सा कड़ा कदम उठाती है। साथ ही राजनीति का चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की रणनीति पर भी प्रश्न उठने लगे हैं?

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