दीपक ठाकुर: NOI।

2019 के लोकसभा चुनाव ने दस्तक दे दी है ये दस्तक भाजपा के लिए किसी सबक से कम नही क्योंकि चार राज्यों में जो चुनाव के नतीजे आये हैं वो इस बात की तस्दीक करने के लिए काफी हैं कि अब ना मोदी लहर है और ना भाजपा पे भरोसा।ये हम नही कह रहे ये राजस्थान,छतीसगढ़ और मध्यप्रदेश में हुए विधान सभा के नतीजे बयां कर रहे हैं।अब जैसा कि हम सभी जानते हैं 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मोदी संजीवनी बन कर आये और देश की जनता के दिलों पे छा गए।

जनता अपना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में देखने को व्याकुल थी वजह थी उनकी वाकपटुता वो अपने संवाद से जनता की नब्ज पकड़ लिया करते थे,ये थे शब्द का इस्तेमाल इसलिए क्योंकि अगर है लिखता तो विधान सभा चुनाव के परिणाम भाजपा को खुश करते नज़र आते खैर जनता ने मोदी पर भरोसा जताया और देश का प्रधानमंत्री बनाया उसके बाद जितने राज्यों में भी चुनाव हुए उनमे से लगभग सभी पर भाजपा का परचम लहराया।

लेकिन धीरे धीरे भाजपा में सत्ता की लालच ने ऐसा घर किया कि वो अपने वादों को भुला बैठी और तो और देश की जनता पर अपनी मनमानी चला बैठी।नतीजा ना किसान खुश ना बेरोज़गार खुश और ना ही भय मुक्त समाज हुआ तो जाहिर तौर पर खामियाज़ा सरकार को ही उठाना था तो हुआ भी वही 3 राज्य हाथ से निकल गए वो भी उस वक़्त जब उसकी ज्यादा जरूरत थी।

अब गलती कहाँ हुई ये जानना भाजपा के लिए बेहद ज़रूरी है और ये जानना भी ज़रूरी है कि देश की जनता की असल चाहत क्या है आपने उज्वला योजना तो चला दी पर सिलेंडर लेने के लिए उनके परिवार के किसी व्यक्ति को रोजगार दिलाने की मुहिम चलाई।आपने मुद्रा लोन का तो एलान कर दिया पर उससे असल मे कौन कौन लाभान्वित हुआ इसका ब्यौरा लिया आपने जो भी स्कीम चलाई या घोषणा की उसके बारे में दोबारा जाना नही जाना अगर जाना होता तो आज जनता आपसे मायूस ना होती।अभी भी वक़्त है आप सक्षम हैं बुद्धिजीवी हैं इसलिए वो करिये जिससे जनता लाभान्वित हो ना के बीच के लोग।

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