सीतापुर-अनूप पाण्डेय

ANCHOR- उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक परिवार रो रहा है. सभी की आँखों में आंसू है. परिवार के सभी लोग डरे और सहमे से है. इस परिवार को इतना खौफ सीतापुर पुलिस का एक दरोगा से है. जिसने इनकी माँ को पिछले 3 महीनो से कैद कर लिया है. पीड़ित परिवार का कहना है की न तो दरोगा उनकी माँ से उनकी बात कराता है न मिलने देता है. पीड़ित लड़कियों का आरोप तो ये भी है की उनकी माँ को दरोगा ने वैश्यवृत्ति के धंधे में धकेल दिया है. इतना ही नहीं दरोगा पर ये भी आरोप है की वो कई महिलाओं से वैश्यवृत्ति का धंधा करवाता है. लेकिन उसके आगे कोई बोलने को तैयार नहीं है. पुलिस अधिकारियों में भी दरोगा की शिकायत की गयी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई. पीड़ित लड़कियों के अधिकारियों ने ब्यान दर्ज किये लेकिन उसके बाद सभी अधिकारी शांत हो गए आगे की कोई कार्यवाही नहीं हुई न ही दोनों बहनों को कोई जवाब मिला. पुलिस अधिकारी अभी भी जांच की बात कहते है. सीतापुर पुलिस से अब ये पीड़ित बच्चियां पूरी तरह टूट चुकी हैं और योगी महाराज की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है. ताकि उनकी माँ की उनसे मुलाक़ात हो सके.
सीतापुर से 35 किलोमीटर दूर पिसावां इलाके का ये परिवार बेहद परेशान है. इस परिवार में अब पिता सहित दो बेटियाँ है. दोनों की पढाई चल रही थी. जो अब पूरी तरह चौपट हो चुकी है. सभी की आँखों में आंसू है. और अपनी बात कहने में होंठ लडखडा रहे है. चेहरे पर कंपकपी और डर साफ़ दिखाई दे रहा है. पीड़ित परिवार का ये डर यूपी पुलिस के एक दरोगा से है. इस दरोगा का नाम राम अनुज मौर्या है. पीड़ित बच्चियों और उसके पिता ने गंभीर आरोप लगाये है. आरोप है की उनकी माँ के साथ दरोगा वैश्यवृत्ति का धंधा करवाता है. बच्चियों से उनको मिलने तक नहीं देता. मिलने जाओ तो गालिया देता है. धमकाता है इतना ही नहीं भगा देता है. पुलिस अधिकारियों से भी कह कर हार गए लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है. पीड़ित बच्चियों ने बताया की दरोगा राम अनुज मौर्या जब पिसावां थाने में तैनात थे तब कभी – कभी मेरे घर आते जाते थे. हम उनको परिवार के जैसा ही मानते थे. कुछ दिन पहले उनका तबादला थाना तालगांव में हो गया. अभी 4 महीने पहले मेरी माँ छत से गिर गयी थी तो पैर टूट गया था. जिसके बाद दरोगा ने जबरन मेरी माँ को सीतापुर बुलाया और उसके बाद वो कभी वापस नहीं आई.

VO- 3- आँखों में आंसू लिए कंपकंपी आवाज़ में पीड़ित पिता ने बताया की जितनी बार भी दरोगा की शिकायत अधिकारियों से की अलग – अलग नंबरों से धमकी मिली. कोई सुनने वाला नहीं है. दो बेटियां बड़ी है. मुझे कुछ हो गया तो क्या होगा इनका इसी लिए कुछ पैसे थे दोनों को लाकर दिल्ली चला गया था कुछ दिन रहने के बाद अब वापस आया हूँ. दूसरों के खेत में मजदूरी करके बच्चियों को पाल रहा हूँ घर से निकलना मुश्किल कर दिया है दरोगा ने. मेरी पत्नी को बंधक बनाये हुए है आने नहीं देता पता नहीं जिंदा भी है या मार डाला है

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