दीपक ठाकुर-NOI। लखनऊ

अमूमन ये देखा गया है कि 25 दिसम्बर के बाद से ठण्ड की जो स्थिति होती है उसे देख कर स्कूली बच्चों को अवकाश दे दिया जाता है ताकि कोई बच्चा ठण्ड से बीमार ना पड़े।लगभग पिछले कई वर्षों से ऐसी ही स्थिति रहती थी जब ठण्ड में कोहरे का समागम होता था मगर इस बार ठण्ड तो है लेकिन कोहरा नही और शायद सरकारी परिभाषा में यही है कि अगर कोहरा है तो ही ठण्ड मानी जायेगी नही तो स्कूल खुले रहेंगे और ऐसा ही हो रहा है।

आगर हम देश की बात करे तो कई जगह बर्फबारी का प्रकोप जारी है जिस वजह से गलन वाली ठण्ड से यूपी बेहाल है लेकिन कोहरा नही है तो डीएम साहब को नही लग रहा के नन्हे बच्चो को ठंड बीमार कर सकती है अब उनकी इस सोच में कितनी सच्चाई है ये आप उन अभिभावकों से पूछिए जो सुबह अपने छोटे बच्चों को उठाकर उन्हें स्कूल भेजने के लिए तैयार कराते हैं और किस प्रकाशन के साथ उन्हें स्कूल छोड़ कर आते है।

अब आजकल पड़ रही ठण्ड की तस्वीर को भी देखिए कोहरा तो नाम मात्र का नही पर हवा में जो गलन है वो आपको घर और बाहर दोनो जगह सिसयाने पर मजबूर कर रही है।जब हम आप घर से निकलते हैं तो जैकेट से लेकर मोज़े तक पहनते है ताकि ठण्ड से बचें और घर आने पर चादर ओढ़ कर बैठ जाते है ऐसा हम सब करते हैं लेकिन ये बात डीएम साहब नही समझ रहे उनको इंतज़ार है कोहरे का इस गलन वाली ठण्ड को वो ठण्ड नही समझ रहे क्योंकि उनके पास इससे बचने के व्यापक इंतजाम हैं पर औरों का क्या उनके बच्चों का क्या ये कौन बताएगा ठण्डक की छुट्टी की ये नई परिभाषा हमे कौन समझायेगा।

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