दीपक ठाकुर-NOI।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज काफी उत्साहित दिखाई दे रहे थे।उत्साह का कारण था उनका उनकी बुआ की पार्टी से गठबंधन का।जैसा कि हम सभी जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में इस बार सपा और बसपा साथ मिलकर चुनावी समर में उतरेंगी आज इसका औपचारिक एलान भी हो गया।संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव और मायावती जी ने ये घोषणा कर दी साथ ही भाजपा और कांग्रेस को एक ही सोच रखने वाली पार्टी भी करार दे दिया।अब कांग्रेस को कोसने वाले इस गठबंधन को कांग्रेस की ज़रूरत चुनाव बाद पड़ेगी या नही ये देखने वाली बात होगी लेकिन फिलहाल सपा बसपा गठबंधन ने कांग्रेस और भाजपा से समान दूरी बनाने का ही फैसला लिया है।

हालांकि इस गठबंधन में आरएलडी के शामिल होने के भी कयास लगाये जा रहे थे पर बात फाइनल ना होने पर फिलहाल ये मामला लटका हुआ ही नज़र आ रहा है।शनिवार को हुई साझा पत्रकार वार्ता में बहन कुमारी मायावती ने जब माईक सम्भाला तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को निशाने पे लिया उनका कहना था कि ये दोनों पार्टियां घोटालेबाज़ और दलित विरोधी रही हैं और दोनो के राज में देश ने एमरजेंसी का सामना किया है इस लिए उन्होंने सपा से दोबारा गठजोड़ का मन बनाया है जो आगे भी जारी रहेगा।

बहन जी ने मोदी सरकार के फैसलों पर भी नाराज़गी जताई कहा नोट बन्दी से आम आदमी आहत हुआ है और अब राफेल का मुद्दा भाजपा के लिए विनाशकारी साबित होगा।इसी मौके पर अखिलेश यादव ने भी भाजपा को खूब खरी खोटी सुनाई और ये तक एलान कर दिया कि उत्तर प्रदेश की जनता ही अपना अगला प्रधानमंत्री तय करेगी जो उनके हिसाब से इसी गठबंधन से होगा इशारा साफ था लेकिन यहां एक बात जो महत्वपूर्ण है वो ये के जब अखिलेश ने काँग्रेस से हाथ मिलाया तो उन्हें लगा था कि यूपी को ये साथ पसंद है पर परिणामो ने उन्हें ना पसन्दगी का आईना दिखा दिया।और अब इस बार बसपा से गठबंधन को जो नई क्रांति का नाम दिया जा रहा है कहीं इसने भी जनता को कुछ खास उत्साहित ना किया तो क्या होगा ये देखने वाली बात होगी।

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