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एक फौजी ने अपनी पत्नी के लिए क्यों बनाया मन्दिर पढे ये खबर।

सीतापुर-अनूप पाण्डेय,अरुण शर्मा/NOI-उत्तरप्रदेश जनपद सीतापुर के पिसावां फरीदपुर गांव में एक अनोखा मंदिर है इस मंदिर के बारे में जो सुनता है हैरान रह जाता है क्योंकि ये मंदिर एक पत्नी की याद में बनवाया गया था सीतापुर जनपद के महोली तहसील के फरीदपुर गांव के निवासी रामेश्वर दयाल मिश्र ने वर्ष 2008 में अपनी पत्नी आशा देवी की याद में इस मंदिर का निर्माण कराया था रामेश्वर दयाल मिश्र जी सेना में थे और कुछ समय पहले उनका भी शवर्गवास हो गया लेकिन मंदिर में उनके प्यार की पूजा आज भी होती है बेटे ने बताया कि पिता जी जब भी बाहर जाया करते तो माता जी को साथ ले जाते थे उनका स्वर्गवास हो गया था।

उसके बाद उन्होंने मंदिर बनवाया जिसमें उनकी मूर्ति लगवाई जिसकी रोजना पूजा करते रहते थे रामेश्वर दयाल मिश्र के बेटे डॉ. मनोज कुमार मिश्र ने बताया कि पिता जी जब भी कहीं रिश्तेदारी या निमंत्रण में जाते थे तो माताजी के बिना नहीं जाते थे अचानक माताजी (आशा देवी) गम्भीर बीमारी से ग्रस्त हो गईं और 30 जनवरी 2007 को इस दुनिया से अलविदा हो गईं जिसके बाद पिता जी ने निर्णय लिया कि वह माताजी के याद में मंदिर का निर्माण करवाएंगे मनोज ने बताया हैं कि 2008 में मंदिर का निर्माण शुरु हुआ और पिता जी जयपुर से संगमरमर की मां की मूर्ति भी बनवाकर लाए थे पूजन-हवन करवाकर मंदिर में मूर्ति की स्थापना कराई और फिर रोजाना पूजा करते थे मनोज ने बताया कि माता जी का शवर्गवास के बाद पिता जी जब भी कहीं बाहर घूमने जाते थे तो कार के बाईं वाली सीट पर माताजी की फोटो हमेशा रखते थे उस सीट पर किसी को बैठने की इजाजत नहीं थी पिता जी का यह सपना था कि माता जी के नाम पर निःशुल्क गरीब बच्चों को शिक्षा दी जाए पत्नी का मंदिर जैसे शाहजहां ने मुमताज के प्यार में ताजमहल बनवाया था वैसे ही मेरे पिता जी ने माता जी के लिए मिनी ताजमहल के रुप में ये मंदिर बनवा दिया वर्ष 2012 में कैप्टन रामेश्वर दयाल मिश्र की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। भारत-चीन युद्ध (1962) और भारत-बांग्लादेश युद्ध (1970) में भाग लेने वाले कैप्टन रमेश्वर दयाल मिश्र को सेना द्वारा विशेष सेवा पदक से नवाजा गया है। उनके परिवार और ग्रामीणों के मुताबिक वो दोनों लोग भले नहीं रहे लेकिन उनके प्यार की कहानी आज भी अमर है।

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