सीतापुर-अनूप पाण्डेय/NOI-उत्तरप्रदेश जनपद सीतापुर से डॉ शुचिता ने आज सीतापुर लोकसभा क्षेत्र के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। रसायन शास्त्र में पी एच डी डॉ. शुचिता पिछले काफी समय से निर्माण उद्योग में कौशल विकास के लिए काम कर रही हैं और समाज सेवा में जुटी हैं।

डॉ शुचिता ने यूरोपियन कमीशन आईसीक्यू प्रोजेक्ट्स से गुणवत्ता पता लगाने और प्रबंधन प्रणाली का सर्टिफिकेट कोर्स किया है। ये ग्रामीण विकास मंत्रालय के कपार्ट से भी जुड़ी रहीं। उन्होंने गुजरात महिला सेवा हाउसिंग ट्रस्ट के साथ महिलाओं के कौशल विकास के लिए सेवा स्कूल का प्रारूप भी तैयार किया था।

सीतापुर की बेटी डॉ शुचिता ने पिछले बीस वर्षों में पूरे देश में लगभग सवा लाख लोगों का कौशल विकास कराकर उन्हें निर्माण उद्योग में रोजगार के अवसर दिलाये। वह सीतापुर के बाड़ी गांव की रहने वाली है। उनके पिताजी डॉ सुधीर कुमार, राजस्थान एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी उदयपुर में प्रोफेसर थे।

फिर मणिपुर एग्रीकल्चर कॉलेज में प्रिंसिपल बने और वहां से रिटायर होने के बाद 1995 में बाड़ी आ गए। तब से डॉ शुचिता उनके साथ मिलकर बहुत से स्थानीय लोगों, खास कर महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण, पुष्प उत्पादन, बांस की खेती एवं कंप्यूटर का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार के लायक बनाया।

उन्होंने सीतापुर में ही तकरीबन पांच हज़ार युवकों के कौशल विकास में उनकी मदद की और उन्हें निर्माण उद्योग में रोज़गार के अवसर दिलाये। वो बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) से भी जुड़ीं और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वेच्छा से बिना किसी वेतन के काम किया।

डॉ. शुचिता पिछले 20 वर्षों से सीतापुर में आम लोगों की समस्याओं से जूझती रही हैं। उन्होंने पिताजी के साथ मिलकर बाड़ी में सैकड़ों महिलाओं को फ़ूड प्रोसेसिंग एंड प्रिजर्वेशन यानि खाने के सामान को लम्बे समय तक वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने का प्रशिक्षण दिया। ये काम भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय के सहयोग से किया गया । मतलब जहाँ से भी साधन मिला सीतापुर में लेकर आयी, वो भी बिना किसी प्रचार- प्रसार के। उन्होंने अपने प्रयासों और संसाधन से सीतापुर क्षेत्र के सरकारी तथा गैरसरकारी स्कूलों में अनेकों शौचालय बनवाये और गांवों में सोलर लाइट्स बंटवाये।

अपने प्रयासों से उन्होंने कई हैंडपम्प्स भी ठीक कराये, इससे गर्मी के मौसम में हज़ारों लोगों को राहत मिली। वो क्षेत्र की एक बड़ी समस्या घाघरा नदी में हर साल आने वाली बाढ़ – जल भराव और उससे होने वाली तबाही और आम जनों की परेशानी से अच्छी तरह से परिचित हैं।

उन्होंने अपने प्रयास से ड्रोन की मदद से घाघरा नदी में हर साल आने वाली बाढ़ के कारणों का अध्ययन करवाया है और समस्या के निदान के लिए कार्ययोजना तैयार की हैं। उनके अनुसार, “मैं अपने दम पर प्रयास कर रही हूँ, लेकिन समस्या काफी बड़ी और भयावह है। इससे निपटने के लिए दृढ इच्छाशक्ति के साथ – साथ बड़े संसाधन की ज़रुरत है। इसलिए मैं संसद में अपने लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूँ।”

वो अपने इस प्रयास में सबके साथ, सहयोग और आशीर्वाद की कामना करती हैं।

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