सीतापुर-अनूप पाण्डेय, आशीष कुमार गौड़/NOI-उत्तरप्रदेश जनपद सीतापुर के विधान सभा लहरपुर लोकसभा का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे चुनाव की सरगर्मियां बढ़ती नजर आ रही है जनता के मन में हो रहे बदलाव कभी इधर कभी उधर तो कभी नोटा पर जा रहा है लेकिन इस समय जब हम बात कर रहे हैं लोकसभा सीतापुर की जहां से बहुजन समाजवादी पार्टी से कैसर जहां सांसद रही वहीं इस वक्त सीतापुर लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी से सांसद राजेश वर्मा कांग्रेस पार्टी ने कैसर जहां पर दांव खेला है तो गठबंधन अपने समय में रहे नगर विकास मंत्री नकुल दुबे पर लेकिन बात चुनाव की है. तो सीतापुर लोकसभा से खड़े हुए तीनों प्रत्याशियों में किसका पलड़ा भारी है ये खुलता नजर आरहा है और ज्यादा साफ़ तौर पर अभी कह पाना मुश्किल है लेकिन अब हम बात करते हैं विधान सभा लहरपुर की और खास करके लहरपुर कस्बे की जहां पर कैसर जहां का गढ़ माना जाता है लेकिन वह कैसर जहां से टूटता हुआ नजर आ रहा है। उन्ही के मुस्लिम समाज के लोग छोड़ते नजर आरहा है । नकुल दुबे का आखिर क्यों पलड़ा भारी होता चला जा रहा है क्योंकि गठबंधन श्री नकुल दुबे के साथ दलित वर्ग.मुस्लिम वर्ग के साथ साथ ब्राह्मणों में भी नकुल दुबे ने अपनी पैठ जमाली है जो कि भारतीय जनता पार्टी के लिए एक अच्छी खबर नहीं होगी क्योंकि ब्राह्मण तबका भारतीय जनता पार्टी के चिंता का विषय भी बन सकता है विधान सभा लहरपुर की यदि बात की जाए तो प्रॉपर लहरपुर में सांसद राजेश वर्मा 5 वर्षो तक दिखे नही न कोई विकास हुआ है । भारतीय जनता पार्टी के लिए एक चिंता का विषय बन सकता और कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है क्योंकि लहरपुर की जनता ने अब तक सांसद राजेश वर्मा को प्रॉपर लहरपुर के कस्बे में घूमते हुए नहीं देखा गया है इसलिए भारतीय जनता पार्टी को विधान सभा लहरपुर में नुकसान उठाना पड़ सकता है फिलाहाल अभी अनुमान ही लगाया जा सकता है जनता के बीच में और खासकर लहरपुर में नकुल दुबे के द्वारा ज्यादा टाइम दे करके जनता को अपने पक्ष में करने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है और कुछ हद तक वह संभव होता भी नजर आ रहा है नकुल दुबे का साथ दलित वर्ग के साथ-साथ ब्राह्मण तब समाज का भी उनके साथ जुड़ने लगा है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है वहीं कैसर जहां की बात करते हुए कहा जा सकता है कि कांग्रेस पार्टी से कैसर जहां के लिए प्रचार प्रसार के लिए जितिन प्रसाद व अन्य कई दल बदलू दिग्गजों का साथ मिलते हुए भी कैसर जहां का पल्लडा अब तक भारी नजर नहीं आ रहा है जनता बहुत ही जोरों से 6 मई को जब मतदान होना है तब का रास्ता देख रही है

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