उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी में जो काम किया है वो आज भी लोगो की ज़ुबान पर है अपने कार्यकाल में अखिलेश यादव ने यूपी का खूब विकास किया और जनता से जुड़ी लाभान्वित योजनाओ को चलाया माना ये जा रहा था कि अखिलेश यादव ही 2017 में दोबारा उत्तर प्रदेश की बागडोर सम्भालेंगे लेकिन चुनाव से ठीक पहले जो हुआ या यूं कहा जाए कि अखिलेश ने जो किया वो खुद अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने से कम नही था।

अखिलेश यादव ने 2014 में हुई मोदी लहर के सामने खुद नतमस्तक हो गए वो इतना भयभीत हो गए के उन्होंने यूपी में कांग्रेस का हाथ थाम लिया इसका एक कारण ये भी था कि उस दौरान खुद उनके पार्टी में कलह चल रही थी जिसका खुद उन्होंने आकलन किया और राहुल के साथ जोड़ी बना कर जनता के सामने आए।जनता को राहुल और अखिलेश की ये जोड़ी पसन्द नही आई इसका पूरा फायदा भाजपा को मिला अटकलों का बाज़ार भी गर्म था कि अखिलेश अकेले लड़ते तो जीत सकते थे।

खैर इस चुनाव में सपा दूसरे नंबर की पार्टी पर सिमट के रह गई लेकिन अखिलेश ने इस हार से बिल्कुल भी सबक नही लिया और 2019 के लोकसभा चुनाव में बुआ को साथ ले लिया,बुआ मायावती के साथ से उन्हें लगा कि इस बार 80 मे से 50 सीट तो उनका गठबंधन जीत ही जायेगा हालांकि इस गठबंधन से खुद मुलायम सिंह भी खुश नही थे लेकिन बेटे की ज़िद के आगे वो असहाय नज़र आये जिसका अंजाम ये हुआ कि जो सपा 2014 में दूसरे नम्बर पे थी वो लोकसभा चुनाव में तीसरे नम्बर की पार्टी बन गई और बुआ जी को ये फायदा हुआ

कि 2014 में सूपड़ा साफ होने के बाद अखिलेश की बदौलत 10 सीटें मिल गई तो फायदे में रही बुआ और एक बार फिर अखिलेश के दांव हुआ फेल अब इससे भी अखिलेश की आंख ना खुली तो कहना गलत नही होगा कि सपा भी कांग्रेस की तरह अपने वजूद को ही खो देगी।

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