दीपक ठाकुर:NOI-

2019 लोकसभा चुनाव में जब परिणाम आया तो यूपीए दम तोड़ता हुआ दिखाई दिया वही दूसरी तरफ एनडीए का झंडा बुलंद रहा सबको अंदेशा था कि एनडीए और खास तौर पर भाजपा बेहतर प्रदर्शन ज़रूर करेगी हुआ भी कुछ ऐसा ही नतीजे आने के बाद पीएम मोदी को सभी घटक दलों ने खूब बधाई भी दी सबको लग रहा था कि मोदी के नाम पर ही ये जनादेश आया है मगर शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही एनडीए को भी ग्रहण लगता दिखाई देने लगा।

ऐसा क्यों हुआ ये भी जान लिया जाए तो जैसा कि हम सबने देखा कि भाजपा के पास अपने खुद के इतने नम्बर हैं कि उसे एनडीए की कोई ज़रूरत नही फिर भी भाजपा ने सभी घटकदलों के साथ विचार विमर्श कर उन लोगों के नाम तय किये जिन्हें मन्त्रिमण्डल मिलना था जिसमे सिर्फ जे डी यू का कैंडिडेट नदारद दिखाई दिया वजह ये सामने आई के नीतीश बाबू चाह रहे थे कि उनके कम से कम दो नेताओ को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए क्योंकि वो 16 सीट ले कर आये हैं लेकिन उनकी इस मांग को पूरा नही किया जा सका और एक मंत्री बनाने की बात रखी गई जिस पर नीतीश बाबू नाराज़ हुए और कहा बाहर से एनडीए के साथ रहूंगा कोई मंत्री पद नही चाहिए।अब बाहर से साथ रहना उनकी मजबूरी इस लिए भी था कि अगर वो समर्थन वापस भी ले लेते फिर भी भाजपा का बाल बाका नही होता तो ये बात यहीं समाप्त हुई।

फिर नीतीश बाबू ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया जिसमें भाजपा का कोई कैंडिडेट नही लिया और जीतम राम मांझी से गल बहियाँ करते नज़र आने लगे संकेत साफ था कि जो एनडीए के खिलाफ है नीतीश बाबू उसके साथ हैं और तो और खबरे ये भी आ रही है कि बिहार के होने वाले विधान सभा चुनाव में जे डी यू एनडीए से अलग चुनाव में लड़ेगी तो हो गया ना साफ की पद ना मिलने की कसक ने दरार डाल ही है।

वही अब बात करते हैं एनडीए के एक और घटक दल शिवसेना की जिसने महाराष्ट्र में भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और अच्छा परफार्म भी किया हालांकि उनकी पार्टी का भी एक चेहरा मंत्रिमंडल में है लेकिन अब शिवसेना मांग रहा है डिप्टी स्पीकर का पद अब अगर ये पद उसको नही मिला तो हो सकता है एक और बिखराव।लेकिन यहां रिश्ते बनते बिगड़ते समय भी नही लगता ये भी जनता अच्छी तरह जानती है।

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