दीपक ठाकुर:NOI।

2019 में जो हुआ वो हुआ अब तो 21 की तैयारी है जी हां यही तैयारी बंगाल को खून की होली खिलवा रही है और तैयारी किसकी है तो राजनैतिक दलों की तो ज़िम्मेदार कौन वहां की सियासत और सियासतदार मगर इन सब मे पिस कौन रहा है तो सीधा जवाब है बंगाल की जनता।

बंगाल में जब से ममता बनर्जी की सरकार बनी है तभी से उनकी सरकार पर पक्षपात का आरोप लगता आया है आरोप लगता है कि वो मोहर्रम को ज़्यादा तवज़्ज़ो देती हैं और दुर्गा पूजा पर रोक लगाती है जो के कभी बंगाल का सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित त्योहार माना जाता था,बस इसी बात को भाजपा ने अपना एजेंडा बनाया और अपनी लोकसभा सीटों में बढोत्तरी कर ली अब यही बढ़त टीएमसी के गले नही उतर रही नतीजा खून और आतंक का माहौल बन गया बंगाल।

टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं की इन दिनों हत्याएं हो रही हैं लेकिन वहां की सरकार 2021 विधान सभा के चुनाव की तैयारी में जुटी दिखाई दे रही है कानून व्यवस्था चौपट है मुह से बड़ी बड़ी बातें हो रही हैं।और तो और बंगाल में राष्ट्रपति शासन ना लग जाये इसका डर भी सता रहा है जिसमे किसी को नुकसान तो किसी को फायदा नज़र आ रहा है सवाल बस इतना ही है कि आखिर निर्दोषों का खून क्यों बहाया जा रहा है सत्ता की लालच में लोकतंत्र का गला क्यों दबाया जा रहा है?

इन सवालों के जवाब नेताओ के पास नही होंगे क्योंकि उनको तो शासन करने की लत लगी है उन्हें क्या फर्क पड़ता है कि बंगाल में कितनी आग लगी है।हल्ला मचा कर वो मतदातों को अपनी तरफ करना चाहते हैं लेकिन उनको हो रही परेशानियों को दूर नही करना चाहते हैं वो जानते हैं ये जनता उनका वोट बैंक है जो हमारा है वो तो साथ है ही जो नही है बस उसी को तो ये सब दिखा रहे हैं।

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