आज 7वे दिन भी जारी रहा।आपको बता दें कि अपनी इसी मांग को लेकर 24 जुलाई 2019 से उत्तर प्रदेश के जिला फोरम और राज्य आयोग में कोई भी विधिक कार्यवाही नही की जा रही जिसके परिणाम स्वरूप उपभोक्ताओं को खासी दिक्कत पेश आ रही है।फ़ोरम का गठन ही इसलिए किया गया था कि उपभोक्ताओं को 90 दिन के भीतर उनकी समस्या का हल मिल जाये लेकिन स्टाफ की कमी से ऐसे कामो में एक वर्ष से भी ज़्यादा का समय लग जाता है साथ ही अधिवक्ताओं पर ज़्यादा प्रेशर भी होता है। इसी के बार मे प्रस्ताव पास हुआ कि जब तक शासन या राज्य आयोग कमीशन से कोई लिखित आश्वासन नियुक्ति को लेकर नही आता तब तक समस्त विधिक कार्यों से अधिवक्ता विमुख रहेंगे।

इस पूरे मामले में राज्य आयोग के चेयरमैन माननीय सैयद अख्तर हुसैन ने आफ द कैमरा कहा है कि वो हड़ताल का समर्थन नही करते क्योंकि सुप्रीमकोर्ट की गाईड लाइन के हिसाब से नियुक्ति की जाएगी जिसमें 2 माह का समय लग जायेगा।वही बार के अध्यक्ष बृज कुमार उपाध्याय ने चेयरमैन साहब की बात को सिरे से नकारते हुए कहा कि माननीय उच्च न्यायालय ने ऐसी कोई गाइड लाइन नही दी है जिसमे लिखित परीक्षा की बात कही हो ।बृज कुमार उपाध्याय ने कहा कि अगर जल्द नियुक्तियों को ना किया गया तो अधिवक्ताओं का कार्यबहिष्कार और तेज़ होगा जो विधान सभा तक पहुंचेगा।

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