आज प्रेमा उदास है…….

बहराइच :(अब्दुल अजीज)NOI:- आज प्रेमा उदास है….. वह कहती है कि उसे नहीं पता कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ | यह एक इकलौता केस नहीं है, ऐसी बहुत सारी घटनाएँ हैं जो किशोरावस्था मे माँ बनने वाली महिलाओं के चेहरे पर उदासी दे जाती हैं |
हम बात कर रहे हैं शिवपुर ब्लाक के पिपरी गाँव के प्रेमा की | पहली बार जब माँ बनी तो प्रेमा की उम्र महज 17 वर्ष थी | समय से पहले ही आठवें महीने मे बच्चे का जन्म हो गया | जन्म के समय शिशु के दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हुये थे | उसे क्लब फुट की बीमारी थी, जिसका इलाज जिला – चिकित्सालय मे चल रहा था लेकिन कई और गंभीर बीमारियों की वजह से दो माह बाद शिशु की मृत्यु हो गयी | डीसीपीएम मो0 राशिद ने बताया कि आशाओं के माध्यम से कम उम्र की गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उन्हे उच्च जोखिम की श्रेणी मे रखा जाता है तथा सुरक्षित प्रसव हेतु विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इनकी देखभाल की जाती है |
डॉ अंजू श्रीवास्तव चिकित्साधिकारी महिला अस्पताल के अनुसार 20 वर्ष की उम्र से पहले महिला का शरीर माँ बनने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होता | शरीर की मांसपेशियां और हड्डियाँ पूरी तरह विकिसित नहीं होती, जिसकी वजह से गर्भपात होने या रक्तस्राव होने की संभावना बढ़ जाती है | वहीं कम उम्र मे गर्भवती होने से गर्भ मे पल रहे शिशु का शारीरिक अथवा मानसिक विकास भी पूरा नहीं होता है | ऐसे शिशु अक्सर समय से पहले या कम वजन के जन्म लेते हैं | इन शिशुओं मे संक्रमण होने की संभावना अधिक होती है |
गौरतलब है कि कम उम्र मे माँ बनने का सबसे बड़ा कारण बाल विवाह है | सरकारी नियमों के अनुसार 18 वर्ष से पहले लड़की की और 21 वर्ष से पहले लड़के की शादी करना गैर कानूनी है | साबित होने पर कठोर कारावास या आर्थिक दंड अथवा दोनों का प्राविधान है |
समाज के कुछ वर्गों मे बाल विवाह अब भी प्रचलन मे है | नेशनल फेमली हैल्थ सर्वे 2015-16 के अनुसार जनपद बहराइच मे 20 से 24 साल की 41 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले हो गयी | हालांकि कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं इस सामाजिक बुराई को दूर करने का प्रयास कर रही हैं |
सरकारी प्रयास –
 नए शादी शुदा दंपत्ति को पहल किट के माध्यम से परिवार नियोजन साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना |
 प्रत्येक माह की 9 तारीख को कम उम्र की गर्भवती महिलाओं / उच्च जोखिम वाली महिलाओं को चिन्हित कर उनके स्वास्थ्य की विशेष देखभाल करना |
 किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत किशोरों को शादी की सही उम्र एवं प्रजनन स्वास्थ्य विषय पर जानकारी देना |
 जन जागरूकता हेतु ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति की बैठकों मे बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणामों पर चर्चा करना |

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