बहराइच में परम्पराओं के अनुरूप मनाया जा रहा है यौम ए आशूरा और दुलदुल व ताजियों के जुलूओं का जारी है सिलसिला……

अब्दुल अज़ीज़

बहराइच :(NOI) इस्लामी तवारीख की अहम तारीख 10 वीं मोहर्रम व यौम ए आशूरा जिले में परम्परागत तरीके से मनाया जा रहा है।इस पर्व को शांति पूर्वक सम्पन्न कराने के लिये जिला प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है,जिसके अंतर्गत ताजिये व अन्य मोहर्रम के जुलूसों को ध्यान में रखते हुये जिले भर में प्रशसन की ओर से विशेष मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति कर बड़े पैमाने पर पुलिस फोर्स की भी तैनाती की गई है।मोहर्रम के जुलूसों को देखते हुये नगर पालिका प्रशासन द्वारा भी जुलूसों के रास्तों पर खास तौर से साफ सफाई को व्यवस्था की गई है।दसवीं मोहर्रम को बहराइच शहर में निकलने वाला दुलदुल का जुलूस स्थानीय नाज़िर पुरा स्थित दुलदुल हाउस से आज सुबह अपने निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक निकाला गया जो अपने गन्तव्य के लिये रवाना हो गया है।दुलदुल हाउस से निकल कर ये जुलूस शहर के मीराखेल पूरा,कबाबची गली,मुस्लिम मुसाफिर खाना, पुराना नानपारा स्टैण्ड,अमीर माह होते हुये सैय्यद वाडा की ओर रवाना हो गया है।इस जुलूस के साथ भारी तादाद में शिया समुदाय के लोग नोहा ख्वानी करते हुये मातम और सीना जनी करके शहीदान ए कर्बला की याद को ताजा कर रहे हैं और हजरत हुसैन और उनके 72 जाँनसीनों की शहादत पर रज ओ गम का इसहार कर कमां और छुरियों से खुद को लहूलुहान कर गम का इजहार करते दिखाई दिये।ये दुलदुल का जुलूस अपने पारम्परिक रास्तों से होता हुआ कर्बला में खत्म किया जायेगा जबकि हजरत हुसैन की शहादत की याद को ताजा करते हुये लोगों ने 9 वीं मोहर्रम को ताजियादारी कर सुबह उसे दफनाने में लग गये है जिसके लिये जिले भर में लोग जुलूस बना कर व जत्थों में ताजिये लेकर कर्बला व शहर के बाहर स्थित सुनसान जगहों पर उन्हें बड़े ही ऐहतराम व अकीदत के साथ दफन कर रहे हैं।मोहर्रम माह का चांद निकलते ही लोग इसके आयोजन में जुट जाते हैं और विभिन्नतारीखों में तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते है उन्ही में से बहराइच शहर में 7 मोहर्रम को हजरत हुसैन के भतीजे तजरत कासिम की शहादत की याद में पारम्परिक दुलदुल जुलूस भी निकाला जाता है जो तीन दिन और रात मिलाकर शहर भर का भर्मण कर वापस आकर दुलदुल हाउस में समाप्त किया गया जबकि हजरत हुसैन की शहादत की याद में 10 वीं मोहर्रम को निकलने वाला ये दुलदुल का जुलूस कर्बला में जाकर खत्म किया जायेगा जो कि इस रास्ते मे पड़ने वाले इलाकों में लोग अकीदत मंदी से उसकी जियारत करते हैं और मन्नते मांगते हुये फूल माला चढाते हैं।इसी तरह शहर के विभिन्न इलाकों से भी ताजियों का जुलूस निकाला जा रहा है जो कर्बला की ओर रवाना होते हुये ताजियों को दफन कर खत्म किया जायेगा।इस दौरान हर जुलूस में सुरक्षा की दृष्टि से भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी साथ साथ चलती नजर आ रही है वहीं जगह जगह के लिये तैनात किये गये मजिस्ट्रेट भी बड़ी ही मुस्तहदी के साथ अपनी डयूटी अंजाम दे रहे हैं।मोहर्रम का ये पारम्परिक पर्व इस्लाम धर्म के संस्थापक रसूल खुदा नबी ए करीम हजरत मोहम्मद साहब के चहेते नवासे हजरत हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है जो कि अपने नाना जान के दीन की हिफाजत के लिये अपने 72 साथियों के साथ लाखों की तादाद में मौजूद यजीदी लश्कर के साथ जंग करते हुये इराक के कर्बला के मैदान में शहीद हो गये थे।

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