दीपक ठाकुर:NOI।

अविन्द केजरीवाल की दिल्ली की सरकार अपने इस सत्र के अंतिम चरण में है यहाँ चुनाव का एलान हो चुका है साथ ही नतीजों की तारीख भी चुनाव आयोग ने निर्धारित कर दी है ऐसे में सभी दल अगली बार अपनी सरकार आने के दावे करते दिखाई देते नजर आने लगे हैं,तो वही आम आदमी पार्टी को ये लगता है कि उसका तख्तोताज उसी के सिरमाथे रहने वाला है आप के इस विश्वास पर कई न्यूज़ चैनल भी मुहर लगाते नज़र आ रहे हैं तो क्या ऐसे में मान लिया जाए कि दिल्ली के दिल मे आप है।

2019 के लोक सभा चुनाव में मोदी सरकार को जो मैंडेट मिला उसने ये साबित कर दिया कि देश की जनता मोदी के हाथों में देश को सुरक्षित देख रही है लेकिन राज्यों में हुए चुनाव इससे बिल्कुल जुदा दिखाई दिए पहले महाराष्ट्र फिर झारखण्ड जैसे राज्य भाजपा के हाथ से निकल गए जबकि मोदी जी ने वहां जा कर लोगो से वोट अपील की थी अब सवाल ये उठता है कि क्या मोदी की लहर फीकी पड़नी चालू हो गई है क्या दिल्ली से भी भाजपा की दूरी बरकरार रहने वाली है तो जवाब है शायद हां क्योंकि आप की सरकार ने जनता की नब्ज को छुआ है और उसके लिए काम किया है जैसा वहां की जनता बता रही है अगर वाकई ऐसा है तो केजरीवाल सरकार का आना तय है और अगर ऐसा हुआ तो 2022 में यूपी भी भाजपा के लिए बचा पाना मुश्किल होगा क्योंकि यहां भी जनता ज़्यादा खुश नजर नही आ रही योगी के राज में।

अब दिल्ली में केजरीवाल की जीत होना क्या इस बात का संकेत साबित होगा कि जो जनता की बात करेगा वही राज करेगा या देश को आगे बढाने के लिए कठोर निर्णय लेना भाजपा के लिए कष्टदाई साबित हुआ।यहां ये बात तो साफ होती दिखाई दे रही है कि अगर हम देश की बात करते हैं तो देश की जनता की अनदेखी नही कर सकते क्योंकि जनता ही देश की बागडोर देने का अधिकार रखती है और जब वही जनता अपने निर्णय से संतुष्ट

नज़र नही आती तो ही वो दूसरे विकल्प की तलाश में जुट जाती है इसलिए देश के साथ देश वासियों की सुध लेना भी भाजपा सरकार के लिए ज़रूरी है नही तो दिल्ली तो दूर की कौड़ी है उसके पास जो है वो उससे भी हाथ धो बैठेगी ऐसे समीकरण दिखाई देना शुरू हो गए हैं।

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