सीतापुर-अनूप पाण्डेय,अनुराग अवस्थी/NOI-उत्तरप्रदेश ये युवा पीढ़ी को हुआ क्या…. कही राख है तो कही धुँआ धुँआ….भारत का भविष्य कहे जाने वाले आज के शिक्षित युवा वर्ग भारत को अंधकार की तरफ ले जा रहे है। हर तरफ नशा माफिया, युवाओं को नशे की गिरफ्त में ले जा रहा है। देश के हर शहर, हर गांव में नशे का पर्याप्त सामान(सिगरेट,चरस,गांजा,कच्ची शराब) उपलब्ध है।आज का युवा बेरोजगारी को लेकर इतना तनाव में है कि उसे तनाव से उभरने के लिए नशे का सहारा लेना पड़ रहा है। हमारी अपेक्षायें सरकार से ज्यादा है कि देश मे नशा बन्दी हो पर कही न कही हमारी कमियां भी उजागर होती है,जब हमारा बच्चा किसी खतरनाक नशे की चपेट में आ जाता है। तब भी हम सिर्फ सरकार को ही कोसते है। जबकि हमारी प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि हमारा बच्चा किसी बुरी संगत में न पड़े। उस पर हर समय नज़र रखी जानी चाहिए और गलत पाए जाने पर उसे दोस्ताना अंदाज़ में उसे उसके भयानक परिणाम को अवगत कराना चाहिए, जिससे वो भविष्य में नशे की बुरी संगत की तरफ नज़र उठा कर भी न देखे। शहर हो या गाँव, हर गली में नशे की गिरफ्त में आये हुए युवा आसानी से देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें देखकर उनकी वास्तविक उम्र का अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल हो जाता है। उन्हें देखने से कम उम्र के युवा अधेड़ प्रतीत होते है। युवाओं को नशे की गिरफ्त में गिराने में समाज का भी कम हाथ नही है। जब हम कभी अपने आसपास किसी युवा को नशे की हालत में देखे तो उसे समझाने के साथ साथ उसके परिजनों को भी सूचित कराए जिससे वो दोबारा ऐसा करने की जहमत न उठा सके। भारत को अंधकार से बचाने के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी।नशे की शुरुआत… सिगरेट की पहली कश के साथसीतापुर में स्थित नशा मुक्ति केंद्र के संचालक विजय ने बताया कि नशे की शुरुआत किशोरावस्था से होती है जब छात्र अपने किसी साथी को इम्प्रेस करने के लिए सिगरेट को मुँह में लगाता है। सिगरेट की कश को लगाते ही छात्र धीरे धीरे नशे की गिरफ्त में आने लगता है। जिसके बाद सिगरेट उसकी आदत में शुमार हो जाती है।लडकिया भी नही है पीछेसीतापुर के एक मनोवैज्ञानिक ने बताया कि नशे की गिरफ्त में युवतियां भी पीछे नही है। बड़े बड़े शहरों में चलने वाले बार मे नशे की सामग्रियां खुलेआम परोसी जाती है, जहां युवकों से साथ युवतियां भी शामिल होती है और सॉफ्ट ड्रिंक के नाम पर हार्ड ड्रिंक का सेवन करती है नशे की गिरफ्त में फसे युवाओं को नशे से निकालने के लिए मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के साथ साथ नशा मुक्ति केंद्र का भी सहारा लेना पड़ता है।मैगी कार्नर बने नशे का हबशहरो में संचालित मैंगी कार्नर,चाय की गुमटियां नशे के हब बन चुके है,जहां पर चरस से लेकर ड्रग्स की सप्लाई आसानी से होती है।कैची पुल स्थित एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुल के आस पास का क्षेत्र इस समय नशे का हब बन चुका है।यहां पर संचालित चाय की गुमटी,पान की दुकानो में छोटा से लेकर बड़ा नशा मात्र कुछ धनराशि पर आसानी से उपलब्ध है। यहां के दुकानदारों की सेटिंग के चलते जिमेदार सब कुछ जानने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है

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