दीपक ठाकुर:-NOI।

दिल्ली में हुए विधान सभा के चुनाव के बाद जो परिणाम आये उससे भरतीय जनता पार्टी को काफी धक्का लगा है उसे अपनी पार्टी के नेताओ से ऐसी उम्मीद नही थी कि उनकी पार्टी को वो दिल्ली में दहाई के आंकड़े तक भी नही पहुंचा पाएंगे।चुनाव परिणाम आने से पहले ही पार्टी को आभास हो गया था कि उनकी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाने से काफी दूर रहेगी यही कारण था कि मतदान के बाद ही भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व वर्तमान गृह मंत्री अमित शाह ने देर रात ही एक बैठक बुलाकर इस पर चर्चा की।

हालांकि एग्ज़िट पोल ने पहले ही ये साफ कर दिया था कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की ही दोबारा सरकार बनने जा रही है लेकिन दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी को ये बिल्कुल भी नही लगा उन्हें लगा कि एग्ज़िट पोल झूठा साबित होगा तभी वो भाजपा की 46 से ज़्यादा सीटें आने की बात करते थक नही रहे थे उनको मोदी मैजिक और भाजपा के शीर्ष नेताओं की रैलियों पर ज़्यादा भरोसा दिखा,लेकिन वो उस ज़मीनी हक़ीक़त को समझ कर भी ना समझ बने रहे जो ये बता रही थी कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को वो सबकुछ दिया है जो वो चाहती थी और भाजपा ने ना सिर्फ आप की सरकार को कोसने का किया बल्कि चुनाव को एक जंग के रूप में भी सामने रख दिया।

आप से भाजपा में आये कपिल मिश्रा ने कहा कि ये चुनाव भारत और पाकिस्तान के बीच की जंग है क्योंकि उन्हें शाहीन बाग में पाकिस्तान नज़र आ रहा था हालाकिं चुनाव आयोग ने उनकी इस टिपडी पर उनकी क्लास लगाई लेकिन साहब चुनाव जीतने के चक्कर मे ऊलजलूल बोलने से बाज़ नही आये।भाजपा नेताओं ने रैलियां भले ही बहुत ज़्यादा की लेकिन उसमें वो सभी नेता वो नही बोल पाए जो जनता सुन्ना चाहती थी और ये काम अरविंद केजरीवाल ने भली प्रकार से किया बिजली,पानी,अस्पताल और शिक्षा को उसने अपना चुनावी हथियार बनाया और चुनाव में बाज़ी भी मार ली।

आप की जीत से भाजपा को करारा धक्का लगा उसे लगने लगा कि जैसा वो सोचती थी जनता उसके उलट ही सोचती थी जनता को अपनी मूलभूत सुविधाओं की फिक्र थी ना के ऐसे विवाद में फसने की जिससे उसे कोई भी लाभ नही था।अरविंद केजरीवाल को टारगेट करने और सी ए ए एनआरसी का माला जपने से भाजपा को कोई फायदा नही हुआ क्योंकि वो मुद्दे जनता में भृम फैलाने वाले थे और आप का भाषण जनता में संतोष पहुंचाने वाला था तो जाहिर है जनता चालक थी उसने आप को दोबारा दिल्ली की कुर्सी दे दी अब भाजपा इस पर चिंतन मंथन कर के भी कुछ ना सीख पाए तो इसके लिए जनता को दोष देना सही नही होगा और ना ही अपनी पार्टी के नेताओ की आलोचना से कुछ होगा,होगा तो बस देश की जनता के हित की बात करने से जो शायद अब भाजपा भी समझ चुकी है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.