दीपक ठाकुर:NOI-

भारत मे इस वक़्त जितना सांस लेना मुश्किल है उतना ही मुश्किल है अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाना क्योंकि सरकारी आदेशो को मुनाफाखोर ना सिर्फ अनदेखा कर रहे हैं बल्कि वो इंसानियत का भी गला घोंट रहे हैं।देश मे जो कोरोना नाम की भयानक विपदा आई हुई
है उससे निपटने के लिए सरकार ने जनता से अपील की है कि 21 दिन घर से बाहर ना निकलें जब ज़रूरत हो तभी बाहर जाएं क्योंकि बाहर आपके जीने का सामान आपको मिलता रहेगा।

लेकिन मुनाफाखोर लोग सरकार के इस अभियान को तार तार करने से कतई बाज़ नही आ रहे हैं होलसेलर जहां एक ओर अपनी मनमानी कर रहा है तो वही फुटकर दुकानदार भी अपने हिसाब के दाम लगाकर सामान दे रहा है इतना ही नही कहीं कहीं तो सामान भी आउट ऑफ स्टॉक बताया जा रहा है जिससे जनता परेशान है क्योंकि सड़क पर जाने पर पुलिसिया डंडा भी उनके स्वागत में तैयार खड़ा है अब ऐसे में आम जनता जीने का सामना कहाँ से और कैसे जुटाए ये एक बड़ा और अनसुलझा सवाल बनकर रह गया है।

हालांकि राज्य सरकारें ये दावा कर रही हैं कि उन्होंने ज़रूरत का सामान घर घर पहुंचाना शुरू कर दिया है पर अफसोस ये नज़ारा हम में से किसी को अभी तक तो दिखाई नही दिया है। सरकार के लिहाज से अगर 14 अप्रैल तक घरों में कैद रहना जीवन बचा सकता है तो इन 21 दिनों में जीवन चलाने का सामान लोगो तक कैसे पहुंचेगा ये भी सरकार के लिए बेहद ज़रूरी है सरकार दावों को जमीनी स्तर पर अमल कराए तभी इस त्रासदी से निपटना आसान होगा और मुनाफाखोरों पर चाबुक चलाये तभी लाकडाउन में जनता का मनोबल डाउन नही होगा और कोरोना से ये जंग भारत जीत जाएगा।

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