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छोटे बच्चों की भी आन लाइन क्लास ये तमाशा क्यों???

दीपक ठाकुर:NOI।

स्कूलों ने इस लाकडाउन या यूं कहें कि कोरोना काल मे भी अपना बही खाता चालू रखने का सटीक कार्यक्रम चलाना शुरू कर दिया है इन स्कूलों को ना अभिभावकों से कोई हमदर्दी है ना बच्चों के स्वास्थ की चिंता इन्हें तो बस इसी बात की चिंता है कि कहीं लाकडाउन के कारण इनकी फीस पर डाका ना पड़ जाए इसलिए ये अभिभावकों को कोई ऐसा कारण नही देना चाहते जिस वजह से अभिभावक फीस देने को मना करे।

इस लाकडाउन के पीरियड में स्कूल आन लाइन क्लासेस को लेकर काफी सख्त हो गए हैं वो बच्चों की 40 मिनट की एक क्लास लेते हैं उसमें क्लास वर्क होमवर्क सब कराते हैं लगभग 3 से 4 घण्टे हमारे बच्चे मोबाइल स्क्रीन को एक टक निहारा करते हैं जिसे देख कर हमें बड़ा अफसोस होता है कि हम चाह कर भी अपने बच्चों को मोबाईल से दूर नही कर पाते हैं।अमूमन गर्मियों की छुट्टी घोषित करने वाले स्कूल भी अभी तक अनं लाइन क्लास का तमाशा सिर्फ इसलिए बना रहे हैं ताकि अभिभावकों को ये लगे कि स्कूल ने बड़ी मेहनत की है अब फीस देना वाजिब है।

लेकिन आन लाइन क्लास का फण्डा अगर क्लास 5 से होता तो समझ मे भी आता पर 1 से ही आन लाईन क्लास शुरू करा देना कहाँ का न्याय है जब हम छोटे बच्चों को मोबाईल से दूर रहने की नसीहत दिया करते हैं तो ऐसे में तो हम खुद ही उनको मोबाईल लगा कि थमा रहे हैं ये जानते हुए भी के इससे बच्चों की आंखों पे असर पड़ेगा उनका स्वास्थ्य बिगड़ेगा लेकिन क्या करें स्कूल काल बनकर हमको ऐसा करने को जो मजबूर कर रहा है।

अभिभावकों ने सरकार से कई बार अपील की है कि उनका और उनके बच्चों का ध्यान रखिये कोरोना काल मे उन्हें बचाइए पर ना सरकार चेत रही है और ना ही स्कूल प्रबंधन अपनी मनमानी से बाज आ रहा है ऐसे में बस अभिभावक और उनका मासूम ही सफर कर रहा है।

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