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कृषि विज्ञान केन्द्र, अम्बरपुर, सीतापुर ने टिड्डी दल से किसानो को किया सचेत ।

सीतापुर-अनूप पाण्डेय,अनुराग मिश्रा(पवन पतौजा)NOI-उत्तरप्रदेश -टिड्डी दल से घबरायें नहीं जोरदार आवाज व धुंऐं से भगाने का करे प्रयास ।
तहसील संवाददाता अनुराग मिश्रा पवन पतौंजा
मिश्रित सीतापुर / टिड्डी नामक कीट से लग भग सभी किसान चिर परिचित है । यह कीट किसानों का सबसे बड़ा शत्रु है । टिड्डी दल एक दिन में 100 से 200 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है । परन्तु इनके आगे बढ़ने की दिशा हवा की गति पर निर्भर करती है । टिड्डी दल सामूहिक रूप से लाखों की संख्या में समूह बनाकर पेड़ – पौधे एवं वनस्पतियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। यह दल 15 से 20 मिनट में फसलों की पत्तियों को पूर्ण रूप से खाकर नष्ट कर देते हैं। यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं । टिड्डी दल खेतों में शाम 6 से 8 बजे के आस-पास पहुँचकर जमीन पर बैठ जाते हैं । और वहीं पर रात गुजारते हैं । रात भर फसलों को नुकसान पहुँचाते रहते हैं । सुबह 8 से 9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं । अंडा देने की अवधि में इनका दल एक स्थान पर 3 से 4 दिन तक ही रुकता है । जौनपुर होते हुए आजमगढ़, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ आदि जिलों में इनका भारी प्रकोप हुआ है । जहां पर इनको काफी संख्या मारा भी गया है । जिससे छोटे – छोटे दल में बट गए हैं । इस समय एक दल फिरोजाबाद के मदनपुर बिकास खण्ड मे भी दिखाई दिया है। कुछ लोगों का कहना है । कि हरदोई जनपद के प्रताप नगर चौराहे से होकर सीतापुर जनपद की तरफ जाते हुए देखा गया है । अर्थात भविष्य यहां आकर क्षति पहुंचा सकते है । लेकिन इनसे घबराने की आवस्यक्ता नहीं है । बल्कि सजग रहने की आवश्यक्ता है ।
टिड्डी दल का समूह जब भी आकाश में दिखाई पड़े तो उनको भगाने के लिए खेत के आस-पास मौजूद घास – फूस का उपयोग करके धुआं करें । अथवा आग जलाना दें । जिससे टिड्डी दल आपके खेत में न बैठकर आगे निकल जाएगा । टिड्डी दल ऊपर उड़ता दिखाई दे तो खेतों मे पटाखे फोड़े , थाली ढोल- नगाड़े आदि बजाकर तेज आवाज करें , टैक्टर के साइलेसंर को निकाल कर भी तेज आवाज कर सकते हैं। क्योंकि यह कीट डरपोक स्वभाव का होता है । तेज आवाज से डरकर भाग जाता है । इस कीट को भगाने के लिए भोर का समय सवसे ज्यादा उपयुक्त होता है । टिड्डी दल के नियंत्रण हेतु क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी या बेन्डियोकार्ब 80 प्रतिशत क्लोरपाइरीफास 50 प्रतिशत ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 प्रतिशत ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 प्रतिशत एस. सी. 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 प्रतिळत डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 प्रतिशत डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर फसल पर छिड़काव हेतु उपयोग किया जा सकता है । मैलाथियान 5 प्रतिशत धूल अथवा फेनवेलरेट धूल की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से बुरकाव किया जा सकता है ।
यदि आपके क्षेत्र में कहीं पर टिड्डी दल दिखाई दे तो उपरोक्त उपाय को अपनाते हुए तत्काल अपने क्षेत्र के उद्यान विभाग एवं कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राविधिक सहायकों / सलाहकारों अथवा कृषि विज्ञान केंद्र अम्बरपुर सीतापुर सीघ्र सूचित करें ।

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