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क्या विकास के साथ दफन हो गए सारे सवाल???

इरफान शाहिद

कानपुर का मध्यवर्गीय परिवार का एक लड़का जिसने ज़ुल्म की दुनिया मे ऐसा नाम कमाया के उसके पीछे कई राज्यों की पुलिस लग गई और तो और उसको गिरफ्तार करवाने वाले को 5 लाख का इनाम भी घोषित कर दिया गया था फिर भी विकास यादव हमारी पुलिस और इंटेलिजेंस को छकाता हुआ फरारी काटता रहा जब उसने जो चाहा वो किया लेकिन उसकी सोच तब खत्म हो गई जब उसका सरेंडर उसकी एनकाउंटर की वजह बन गया।अब सवाल ये है कि 90 के दशक से कानपुर में आतंक का दूसरा नाम बना विकास दुबे आखिर इतना पावरफुल कैसे हो गया जो पुलिस उसको हाथ लगाने से भी कतराती रही।

इसका जवाब एक ही सामने आता है वो ये के विकास दुबे को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त था उसकी सेटिंग हर पार्टी में थी वो पार्टी के काम आता था और राजनैतिक पार्टियां उसको पालती थी एक हाथ दे एक हाथ ले वाली स्कीम ने विकास दुबे को यूपी का नम्बर वन डॉन बना दिया था राजनैतिक पहुंच के चलते पुलिस भी उसकी चाटुकार बनी रही पुलिस उसको पकड़ने के बजाए बचाए जाने की मुद्रा में दिखाई देती रही लेकिन जब उसने पुलिसवालों पर ही अपना आतंक दिखाया तब पुलिस को भी ये समझ मे आया कि जिसे वो संरक्षण दे रही थी वो अब उसके लिए काल बन गया है वही राजनैतिक दलों में भी यही चिंता रही के विकास पकड़ा गया तो सबका खेल खराब हो जाएगा यही वजह रही के जो पुलिस और खुफिया तंत्र उसे ढूंढने में नाकाम रहा उसने उसे पाने के बाद जान से मार दिया जिससे फिलहाल उन सब लोगो को राहत मिल गई जो विकास के बल पर अपना काम निकाल रहे थे।

हालांकि अभी भी विकास की पत्नी उसके कई राज से पर्दा उठाने के लिए जीवित है लेकिन उसकी आवाज़ कहाँ तक जाएगी या उसको कोई सच भी मानेगा ये कहना मुश्किल है अभी विकास के घरवाले बदहवास हैं क्योंकि विकास दुबे अब इस दुनिया से जा चुका है उसकी पत्नी खुद को अकेले छोड़ देने की बात करती है कहती है ठीक किया मार दिया अब जाओ यहां से उसकी आवाज़ में दर्द बहुत था शायद इसलिए क्योंकि वो ये जानती थी कि विकास को विकास बनाया गया फिर उसका काम तमाम कर दिया गया लेकिन विकास को आतंक का नाम दिया किसने ये अब शायद ही हम जान पाएंगे।

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