लखनऊ. वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने में खुद का हाथ होने से इनकार किया है। उन्होंने मामले की सुनवाई कर रही सीबीआई की विशेष अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शुक्रवार को अपने बयान दर्ज कराए।

93 वर्षीय पूर्व उपप्रधानमंत्री ने विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष मस्जिद गिराने की साजिश में किसी भी तरह से शामिल होने से इनकार किया।

आडवाणी ने कहा कि जांच राजनीतिक दबाव में की गई थी जबकि आरोप पत्र तैयार करने के लिए गढ़े गए सबूतों का इस्तेमाल किया गया।

कानूनी मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष न्यायाधीश ने आडवाणी के सामने 1,050 सवालों को रखा और उन्होंने साजिश के हर आरोप को नकारते हुए बहुत सतर्कता से उनका जवाब दिया।

वर्ष 1992 की घटना से संबंधित कुछ वीडियो क्लिपिंग, समाचार पत्रों की रिपोर्ट और अन्य सबूतों की सामग्री के बारे में सवाल करने पर आडवाणी ने उन्हें राजनीतिक प्रभाव और वैचारिक मतभेदों के कारण पूरी तरह से गलत और झूठा कहा।

6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वस्त कर दी गई थी।

जब न्यायाधीश ने कारसेवकों को उनके कथित भड़काऊ भाषण के बारे में सबूतों का हवाला दिया, तो भाजपा दिग्गज ने उन्हें बताया कि सबूत झूठे थे और जांचकर्ताओं ने राजनीतिक दुर्भावना के लिए और राजनीतिक प्रभाव के तहत वीडियो कैसेट और समाचार पत्रों को शामिल किया।

31 अगस्त तक पूरी करनी है सुनवाई

आडवाणी का बयान सुबह लगभग 11 बजे शुरू हुआ। वह अपने वकील महिपाल अहलूवालिया के साथ दिल्ली से अदालत में ऑनलाइन पेश हुए थे।

एक दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपने बयान दर्ज कराए थे।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अदालत को 31 अगस्त तक मामले की सुनवाई पूरी करनी है। कल्याण सिंह और उमा भारती जैसे भाजपा के दिग्गजों के बयान पहले ही दर्ज हो चुके हैं।


Edited by Priyanshu.

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.