reporters

सरकारी दावों पे भरोसा करना मुसीबत मोल लेने के जैसा…

इरफान शाहिद

पिछले लगभग 7 महीनों से हम किस तरह जीवन यापन कर रहे हैं ये हमसे बेहतर कोई नही जानता कोई नही जानता कि कोरोना काल मे हमारा एक एक पल कितना मुश्किल भरा है जिसका कारण कोई और नही हमारी सरकार है ये वही सरकार है जिसने कोरोना की शुरुआत में तो हमे बाप बन कर पालने का काम किया लेकिन जब कोरोना बेकाबू हो गया तो उस बाप ने भी हमे सौतेला समझकर अपने हाल पर छोड़ दिया सरकार ने अपनी मजबूरी दिखाते हुए हमें कोरोना से जंग लड़ने को तो मजबूर कर दिया लेकिन हमारी परेशानियों को कम करने के लिए उसने कोई ठोस कदम नही उठाया।

सरकारी दावों और ज़मीनी हक़ीक़त की बात की जाए तो दोनों एक दूसरे के विपरीत ही नज़र आते हैं सरकार कहती है कि हमने कोरोना मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड बनाये हैं अस्पतालों में उनके इलाज का बेहतर प्रबन्ध किया गया है हम रोज़ हर जगह सैनीटाइजर का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन हक़ीक़त क्या है वो आये दिन कोरोना के बढ़ते मरीज़ और इस वायरस से मृतकों की संख्या बता रही है हमारे कई पत्रकार भाई भी इसकी चपेट में आये लेकिन भगवान की कृपा से वो ठीक भी हुए इसने अस्पताल का कोई विशेष योगदान नही रहा।जो इस दुनिया मे नही रहे उन्हें अस्पताल में आक्सीजन तक नही मिल सकी अस्पतालों में किसी की भर्ती करनी हो तो एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है भर्ती हो गए तो इलाज के लिए फरियाद करनी पड़ती है क्या यही दिन देखने के लिए जनता सरकार चुनती है सरकार होती किसके लिए है जनता के लिए या अपने आगामी कार्यकाल का जुगाड़ करने के लिए ये हम सब समझ चुके हैं सरकार चाहे कोई हो पर जनता के प्रति उसका व्यवहार एक सा ही दिखाई देता है वहा रे मेरी सरकार विज्ञापन में तो आपका कोई सानी नही पर असल मे आपकी कथनी सिफर से सिफर पर ही सिमटी हुई दिखाई देती है।

अब हम यूपी की बात कर लेते हैं यहां भी कोरोना अच्छी खासी चोट दे रहा है लेकिन हमारी यूपी की सरकार सिवाय आंकड़े बताने के कुछ खास करती नज़र नही आ रही हम वीआईपी लोगों और वीआईपी क्षत्रों को छोड़ कर बता रहे हैं जहां किसी प्रकार की कोई सुविधा सरकार की तरफ से नही है। सरकार 5 अगस्त की तैयारी में जुटी है यहां ये भी पता नही की अगस्त का महीना भी कितने लोग देख सकेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.