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नेहरू ने तभी कांग्रेसियों से कहा था, यही मुगालता आपको दिवालिया बना देगा

प्रियांशू

4 जून, 1949 का दिन। कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के नाम पत्र में नेहरू ने लिखा, ‘मुझे यह कहना पड़ेगा कि कांग्रेस के लोग सुस्त हो गए हैं। जनता के साथ उनका संपर्क खत्म हो रहा है।’

नेहरू जब यह सब लिख रहे थे जंगे-आजादी में कांग्रेसियों पर पड़ी लाठियों के जख्म भरे भी नहीं थे। देश के सभी राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी। गांवों से महानगरों तक एकछत्र राज और दूर-दूर तक कोई चुनौती नहीं।

लेकिन नेहरू जानते थे, ‘तेजी से बदलती दुनिया में दिमाग के जड़ हो जाने और मुगालते में रहने से ज्यादा खतरनाक कोई चीज नहीं है।’

उन्होंने लिखा, ‘हम अपने पुराने नाम और प्रतिष्ठा के बल पर टिके हैं लेकिन पुरानी पूंजी हमेशा नहीं बनी रहेगी।’

नेहरू ने आगाह किया था, ‘बिना कमाए संचित पूंजी पर जीना कांग्रेस को दीवालियेपन की कगार पर ले जाएगा।’

इंदिरा गांधी ने जब इमरजेंसी की घोषणा की तब वह
इमरजेंसी की घोषणा नहीं कर रही थीं, वह बता रही थीं कि कांग्रेस की संचित पूंजी खत्म हो गई है।

जिस पार्टी में कभी हर साल अध्यक्ष पद का चुनाव होता था। किसी दोबारा अध्यक्ष बनने में लाले लग जाते थे। जो कभी महात्मा गांधी तक के सामने इतनी सरेंडर नहीं हुई कि उसे उस महामानव तक में ‘संपूर्ण आस्था व्यक्त’ करनी पड़ी हो।

आज जब कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य पीएल पुनिया ने बताया, ‘पार्टी की लंबी बैठक हुई। सभी ने सोनिया जी और राहुल जी में संपूर्ण आस्था व्यक्त की है।’ असल में वह गांधी फैमिली में संपूर्ण आस्था नहीं व्यक्त कर रहे, बता रहे थे कि कांग्रेस दीवालियेपन की कगार पर पहुंच चुकी है।


लेखक भारतीय जनसंचार संस्थान के पूर्व छात्र हैं। व्यक्त विचार उनके निजी हैं।

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