नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मस्जिद के निर्माण के लिए गठित अयोध्या मस्जिद ट्रस्ट में एक सरकारी उम्मीदवार की नियुक्ति को लेकर निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका अयोध्या मामले में हिंदू पक्ष के एक वकील करुणेश शुक्ला ने अपने वकील विष्णु जैन के माध्यम से दायर की है।

उत्तर प्रदेश के सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या में आवंटित भूमि पर एक मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए एक 15 सदस्यीय ट्रस्ट ‘इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन’ बनाया है। अयोध्या विवादित भूमि मामले में पिछले साल नौ नवंबर को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को विवादित भूमि को मंदिर निर्माण के लिए देने और एक ट्रस्ट का गठन करने का निर्देश दिया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में वैकल्पिक स्थान पर पांच एकड़ जमीन आवंटित करने का निर्देश दिया था। बोर्ड द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ‘बाबरी मस्जिद मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और आदेश के अनुपालन में, उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के गांव धन्नीपुर में पांच एकड़ भूमि आवंटित की थी और बोर्ड ने फरवरी 2020 में इसे स्वीकार कर लिया था। बोर्ड ने आम जनता के लाभ के लिए मस्जिद और अन्य सुविधाओं के निर्माण के लिए इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम से एक ट्रस्ट बनाया है।’

ट्रस्ट में अधिकतम 15 ट्रस्टी होंगे। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड इसके संस्थापक ट्रस्टी होंगे, जबकि जफर अहमद फारुकी मुख्य ट्रस्टी/ अध्यक्ष होंगे। फरवरी में उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए प्रदान की गई पांच एकड़ जमीन को स्वीकार किया था। विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रस्ट एक धर्मार्थ अस्पताल, सार्वजनिक पुस्तकालय और भारत-इस्लामी सभ्यता की विरासत को प्रदर्शित करने वाला एक केंद्र भी बनाएगा।

 

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