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सीएम बोले- पांच लाख ने दी थी बीएड की परीक्षा, किसी को नहीं हुआ कोरोना; NEET और JEE के पक्ष में हैं हम

 

लखनऊ। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेईई और नीट परीक्षाओं के आयोजन को टालने की विपक्षी राजनीतिक दलों की मांग के बीच शुक्रवार को स्पष्ट किया कि यूपी सरकार इन परीक्षाओं के आयोजन का समर्थन करती है।

योगी ने लखनऊ के लोकभवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा, प्रदेश सरकार नीट तथा जेईई परीक्षाओं के आयोजन का समर्थन करती है। उन्होंने कहा, गत नौ अगस्त, 2020 को राज्य में बीएड की प्रवेश परीक्षा संपन्न हुई, जिसमें लगभग पांच लाख अभ्यर्थी थे। इस परीक्षा में कहीं से भी संक्रमण (कोरोना वायरस) की कोई खबर नहीं आई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश की परीक्षा भी संपन्न कराई गई है।

विपक्षी दल परीक्षा नहीं करवाने के पक्ष में
नीट और जेईई के परीक्षा को टालने की मांग लगातार हो रही है और छात्रों की इस मांग का विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला है। वहीं अब गैर बीजेपी शासित राज्यों के छह मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को इस साल नीट, जेईई परीक्षाएं कराने की अनुमति देने वाले उसके आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया।वहीं, दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के विरोध के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने जेईई और नीट के आयोजन की तैयारियां तेज कर दी है। बुधवार शाम तक जेईई-नीट के करीब 23 लाख में 14 लाख अभ्यर्थियों ने इसे डाउनलोड भी कर लिया। एनटीए के चैयरमैन विनीत जोशी ने कहा कि यह दर्शाता है कि बच्चे बेसब्री से परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं।

अखिलेश ने उठाए कई सवाल
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, जेईई, नीट परीक्षा करवाने पर अड़ी भाजपा ने अब ये ख़ुलासा कर दिया है कि उसने ‘मानव संसाधन मंत्रालय का नाम क्यों बदला, क्योंकि शिक्षा व शिक्षार्थियों के प्रति उसका दृष्टिकोण ‘मानवीयता से रिक्त है। सपा अध्यक्ष ने 27 अगस्त को भी परीक्षार्थियों और अभिभावकों के समर्थन में तथा परीक्षाओं व भाजपा के ख़िलाफ़ खुला पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा, भाजपा की तरफ से ये हास्यास्पद और तर्कहीन बात फैलाई जा रही है कि जब लोग दूसरे कामों के लिए घर से निकल रहे हैं तो परीक्षा क्यों नहीं दे सकते ? पत्र में कहा गया कि भाजपाई सत्ता के मद में ये भी भूल गये कि लोग मजबूरी में निकल रहे हैं। खुले पत्र में एक नारा भी लिखा गया, आइये मिलकर कहें, ”जान के बदले एग्जाम’ नहीं चलेगा-नहीं चलेगा।” अखिलेश ने इससे पहले 26 अगस्त को ट्वीट कर कहा था कि नीट, जेईई एवं अन्य परीक्षाएं रोकने के लिए हृदयहीन सरकार एक बार माता-पिता के दिल से सोचे । कोरोना व बाढ़ में केवल शहरी व अमीर ही केंद्रों तक पहुँचने व परीक्षा देने में समर्थ हैं । ”ये पैसों वालों की भाजपा सरकार का ग़रीब-ग्रामीण के ख़िलाफ़ षड्यंत्र है ।

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