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सीतापुर” अधिकारियों के निर्देश के बाद भी सिस्टम पर हावी हैं अवैध भूमाफिया।

सीतापुर” अधिकारियों के निर्देश के बाद भी सिस्टम पर हावी हैं अवैध भूमाफिया।

सीतापुर-अनूप पांडेय/NOI-उत्तरप्रदेश जनपद सीतापुर में हावी है भू माफिया सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ओर जहां भू माफियाओं के खिलाफ सख्त रवैये का संदेश दे रहे हैं वहीं जनपद की तहसील लहरपुर पर दबंग और भूमाफिया आबादी और तालाब की जमीनों पर लगातार कब्जा कर रहे हैं हालात और बदतर तब हो जाते हैं जब प्रकरण उप जिला अधिकारी के संज्ञान में आता है और उनके निर्देश पर मौके पर पहुंचकर लेखपाल और कानूनगो हो रहे अवैध निर्माण को रोकने का दिशानिर्देश जारी करते हैं और पुलिस को इसकी सूचना देते हैं इसके बावजूद भी दबंगों द्वारा किया जा रहा अवैध निर्माण कार्य जारी रहता है। इसके बाद उप जिलाधिकारी द्वारा पुलिस क्षेत्राधिकारी को जब पत्र लिखकर हो रहे अवैध निर्माण कार्य को रोके जाने और यह टिप्पणी कि अभी तक निर्माण कार्य न रोका जाना खेद जनक है कहा जाता है तब पत्रको पुलिस क्षेत्राधिकारी द्वारा गंभीरता से लेने के बाद कड़े निर्देश स्थानीय पुलिस को दिए जाते हैं तब जाकर स्थानीय पुलिस की कुंभकरणी नींद टूटती है और हो रहे निर्माण कार्य को रोक दिया जाता है। घटनाक्रम पर नजर डालें तो कोतवाली क्षेत्र के रायपुर गंज में जयप्रकाश और श्रीप्रकाश द्वारा तालाब की जमीन पर अवैध रूप से निर्माण कार्य किया जा रहा था जिसकी लिखित शिकायत गांव के ही आशीष तिवारी पुत्र सुरेश तिवारी ने लहरपुर कोतवाली पुलिस को दी जिसके उपरांत कोतवाली पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर दोनों की बात सुनने के बाद एक तुगलकी फरमान जारी करते हुए जयप्रकाश और श्रीप्रकाश से कहा गया कि जाकर तुम अपना निर्माण कार्य करो क्योंकि मामला राजस्व विभाग से संबंधित था जिसके चलते निराश आशीष तिवारी ने एक शिकायती प्रार्थना पत्र 28 नवंबर को उप जिलाधिकारी रामदरश राम को प्रेषित किया जिस पर उपजिलाधिकारी ने क्षेत्रीय लेखपाल डोरेलाल से कार्य रुकवा कर और जांच कर आख्या देने को कहा। क्षेत्रीय लेखपाल मौके पर पहुंचे और कार्य रोकने को कहा लेकिन दबंगों ने कार्य को नहीं रोका। 29 नवंबर को पुनः आशीष तिवारी ने उप जिलाधिकारी राम दरस राम को दूरभाष पर हो रहे अवैध निर्माण कार्य की जानकारी दी जिस पर पुन: क्षेत्रीय लेखपाल कानूनगो और बीट के दरोगा मौके पर पहुंचे तो दबंगो द्वारा उस समय तो कार्य रोक दिया गया किंतु उनके चले जाने के बाद पुनः युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। दबंगों की दबंगई से परेशान आशीष तिवारी ने 2 दिसंबर को पुन: उपजिलाधिकारी राम दरस राम को एक शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया जिसमें आशीष तिवारी ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। आशीष तिवारी द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी राम दरस राम ने पुलिस क्षेत्राधिकारी यादवेंद्र यादव को एक पत्र लिखकर स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर खेद जताते हुए स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। उप जिलाधिकारी द्वारा लिखे गए पत्र पर पुलिस क्षेत्राधिकारी ने त्वरित कार्रवाई हेतु कोतवाल ओपी राय को कड़े दिशा निर्देश दिए। क्षेत्राधिकारी के कड़े रुख के बाद दबंगों द्वारा कराए जा रहे अवैध निर्माण कार्य को आनन-फानन में रात 8:00 बजे पुलिस द्वारा रुकवा दिया गया लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जब 5 दिन पूर्व ही राजस्व कर्मियों द्वारा अवैध निर्माण को रोकने के निर्देश दिए गए थे तो कोतवाली पुलिस द्वारा उसका पालन क्यों नहीं कराया गया ? और 5 दिनों के दौरान लगातार अवैध निर्माण किस आधार पर जारी रहा ? इस संबंध में जब उपजिलाधिकारी राम दरस राम से बात की गई तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मेरे आदेश के बाद भी अवैध निर्माण कार्य का जारी रहना निश्चित रूप से चिंता की बात है। उन्होंने कहा कि कार्य को रुकवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुल प्रकरण की जांच की जाएगी, यदि तालाब की भूमि पर निर्माण किया गया है तो उसे गिराया जाएगा और यदि आबादी की जमीन पर भी निर्माण कार्य हुआ है तो भी प्रभावी कार्यवाही की जाएगी। उधर इस संबंध में जब पुलिस क्षेत्राधिकारी यादवेंद्र यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उप जिलाधिकारी द्वारा केसरी गंज के अवैध निर्माण कार्य से संबंधित एक गंभीर पत्र प्राप्त हुआ है, वह मौके पर जाकर स्वयं स्थितियों का मूल्यांकन करेंगे और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जब कोतवाल ओपी राय से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उप जिलाधिकारी द्वारा अवैध निर्माण के संबंध में मुझे भी पत्र मिला है, पत्र का जवाब भेजा जा रहा है। यदि क्षेत्रीय लेखपाल या कोई राजस्व कर्मी तहरीर देगा तो दोषियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की जाएगी। पूरा प्रकरण क्षेत्र में एक ओर जहां चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों में तालमेल ना होना भी दर्शा रहा है।

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