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सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पर वेबिनार का आयोजन हुआ

सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में पर वेबिनार का आयोजन हुआ

लखनऊ,सीएसआईआर-एनबीआरआई एवं एवं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ़ एनवायर्नमेंटल बॉटनिस्ट्स (आईएसईबी), लखनऊ द्वारा द्वारा संयुक्त रूप से आज विश्व पर्यावरण दिवस पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया | वेबिनार में हैदराबाद विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ लाइफ साइंसेज, डिपार्टमेंट ऑफ़ प्लांट साइंसेज के प्रोफेसर ए. एस. राघवेन्द्र मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद थे | प्रो. राघवेन्द्र ने “ग्लोबल वार्मिंग के प्रति प्रकाश संश्लेषण की प्रतिक्रिया और फसल विकास को बनाए रखने के लिए संभावित रणनीतियाँ ” विषय पर चर्चा की।

प्रो. राघवेन्द्र ने बताया कि पर्यावरण परिवर्तन के चलते पृथ्वी की जलवायु सबसे ज्यादा प्रभावित हुयी है, जिससे ग्रीन हाउस गैसों का बढ़ना, वैश्विक तापमान में वृद्धि, ग्लेशियर का पिघलना जैसी घटनाएं विगत वर्षों में देखी गयी है | इस परिवर्तन से हमारे पारिस्थितकी तंत्र पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिला हैं | प्रो. राघवेन्द्र ने कार्बन डाई ऑक्साइड, जो कि मुख्यतः ग्रीन हाउस गैसों में पायी जाती है, की मात्रा में वृद्धि एवं उसके प्रभावों पर चर्चा करते हुए बताया कि उच्च कार्बन डाई ऑक्साइड से पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया कुछ समय के लिए बढ़ जाती है लेकिन इसके चलते पौधों की कुल उत्पादकता पर उलटा असर पड़ता हैं | कुछ पौधों में यह भी देखा गया है कि उनकी पत्तियों एवं फलों में आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्वों का अभाव हो जाता है जिसका सीधा असर उनके उपभोक्ताओं पर पड़ेगा |


प्रो. राघवेन्द्र ने इस वैश्विक तपन के बढ़ने के कारण हमें खाद्य सुरक्षा के लिए कुछ सतत रणनीतियां बनाने पर बल दिया | उन्होंने कहा कि हमें ऐसे पौधों का विकास करना होगा जो ग्रीन हाउस गैसों की बढ़त के साथ- साथ बढ़ते तापमान, अल्ट्रा वायलेट विकिरण को भी सहन कर सके | जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जीनोमिक्स, प्लांट मॉलिक्यूलर फिजियोलॉजी, क्रॉप ब्रीडिंग एवं एकीकृत फसल-मृदा-जलवायु मॉडलिंग को मिलाकर एक अनुसंधानिक रणनीति बनाना बहुत प्रभावी होगा |
इससे पूर्व, सभी प्रतिभागियों एवं गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रो. एसके बारिक ने इस वर्ष की थीम “पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन” के बारे में बताया | उन्होंने बताया कि एनबीआरआई कई दशकों से पर्यावरण सुरक्षा एवं सुधार पर शोध कार्य कर रहा है | वेबिनार के अंत में आईएसईबी के सचिव डॉ. आर डी त्रिपाठी ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।


इस अवसर पर सीएसआईआर-एनबीआरआई, लखनऊ और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के बीच औषधीय पौधों के विभिन्न पहलुओं, गुणवत्ता जांच, औषधीय पौधों की सामग्री की मोबाइल परीक्षण इकाइयों के विकास पर सहयोगात्मक अनुसंधान के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

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