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डीहाइड्रेशन – यह आपके ब्लड प्रेशर को कैसे प्रभावित करता है<br>डॉ प्रवीण झा, कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, रीजेंसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ

डीहाइड्रेशन – यह आपके ब्लड प्रेशर को कैसे प्रभावित करता है
डॉ प्रवीण झा, कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, रीजेंसी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ

गर्मियों की शुरुआत होने से डिहाइड्रेशन होने की समस्याएं बड़े पैमाने पर होने लगती हैं। हालांकि गर्मियों में लोग तरल पदार्थों का सेवन ज्यादा करने लगते हैं लेकिन यह हमारे शरीर की जरूरत की मात्रा को पूरा नहीं करता है। गर्म और उमस भरे दिनों में हमारे शरीर से पसीना निकलता है जिससे पानी की बहुत कमी हो जाती है और कभी-कभी जब हम पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं पीते हैं तो हम डीहाइड्रेशन से पीड़ित हो जाते हैं। अगर समय पर इस स्थिति का निवारण न किया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है। और यह शरीर के ब्लड प्रेशर के लेवल में उतार-चढ़ाव कर सकता है।

डीहाइड्रेशन और कम ब्लड प्रेशर

अगर ब्लड प्रेशर का लेवल 90/60 मिमी एचजी है, तो शरीर में इसे ब्लड प्रेशर का कम लेवल माना जाता है। ख़ून कम होने के कारण डीहाइड्रेशन से ब्लड प्रेशर का कम होना प्रमुख कारण माना गया है। इसलिए ख़ून की सामान्य मात्रा बनाए रखना आवश्यक है ताकि ख़ून आपके शरीर के विभिन्न टिश्यू तक पर्याप्त रूप से पहुंच सके। जब आप डीहाइड्रेटेड होते हैं तो आपके अंदर खून की मात्रा कम हो जाती है और इससे ब्लड प्रेशर में गिरावट आती है। जब ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाता है, तो व्यक्ति को जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिलते हैं।

डीहाइड्रेशन और हाई ब्लड प्रेशर

अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग 140 मिमी एचजी या उससे अधिक है या 90 मिमी एचजी या उससे अधिक की डायस्टोलिक (निचली संख्या) रीडिंग है, तो आपको हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। डीहाइड्रेशन को हाई ब्लड प्रेशर से कैसे सम्बंधित है इस पर बहुत ही कम स्टडी हुई है। दोनों के बीच संबंध का पता लगाने के लिए स्टडी की जा रही है। प्रारंभिक तथ्य बताते हैं कि डीहाइड्रेशन में वैसोप्रेसिन नामक हार्मोन की क्रिया के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ने की संभावना होती है। यह हार्मोन शरीर में तब निकलता है जब ख़ून में सोडियम का लेवल ज्यादा होता है, या जब आपमें कम खून होता है। ये दोनों चीजें तब हो सकती हैं जब आप बहुत ज्यादा तरल पदार्थ नहीं खाते हैं। इसलिए, जब आप डीहाइड्रेटेड होते हैं, तो आपके गुर्दे पानी को मूत्र में प्रवाहित करने के बजाय पुन: अवशोषित कर लेते हैं। वैसोप्रेसिन की उच्च सांद्रता भी आपके ब्लड वाहिकाओं को कसने का काम करती है। इससे ब्लड प्रेशर में वृद्धि हो सकती है।

डीहाइड्रेशन के लक्षणों को अनदेखा नहीं करना चाहिए, कुछ लक्षण निम्न हैं।

प्यास लगना

मुंह का सूखना

बहुत कम बार पेशाब करना
मूत्र का रंग गहरा होता है
थका हुआ महसूस करना
चक्कर आना
भ्रम होना

डीहाइड्रेशन के कारण

अगर आपको लगता है कि पर्याप्त पानी नहीं पीने से आपको डीहाइड्रेशन हो सकता है तो आप बहुत गलत सोचते हैं। डीहाइड्रेशन के अन्य संभावित कारण भी हैं जो निम्नलिखित हैं:

बीमारी – तेज बुखार से भी डीहाइड्रेशन हो सकता है। इसके अतिरिक्त, उल्टी और दस्त होने से शरीर में तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स की हानि हो सकती है।

पसीना ज्यादा निकलना – गर्म मौसम में एक्सरसाइज करने से पसीना आने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती हैऔर अगर आप बुखार से पीड़ित हैं तो आपमें ज्यादा पसीना निकल सकता है।

बार-बार पेशाब आना- ज्यादा पेशाब लगने से भी पानी की कमी हो सकती है। मूत्रवर्धक जैसी दवाएं, डायबिटीज जैसी अंडरलाइंग कंडीशन, और शराब का सेवन सभी बार-बार पेशाब आने का कारण बन सकते हैं।

अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने के लिए यहां पांच तरीक़े बताए जा रहे हैं:

अपने तरल पदार्थ के सेवन के बारे में खुद को जागरूक करने के लिए, आप कितना पानी पी रहे हैं, यह लिखना शुरू करें। ऐसा एक हफ्ते तक करते रहें।

सुबह बिस्तर से उठने के बाद एक गिलास पानी पीने की आदत डालें। अपने साथ एक बोतल रखें और हर घंटे पीते रहें।

अगर आप सामान्य पानी पीने से ऊब चुके हैं, तो आप इसमें एक तीखा स्वाद जोड़ने के लिए नींबू मिला सकते हैं।

आप चाय या कॉफी जैसे गर्म ड्रिंक पी रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप इसे पीने से पहले एक गिलास पानी पिएं।

डीहाइड्रेशन से बचने के लिए, सुनिश्चित करें कि आप ह्यूमिडिफायर चला रहे हैं जो गर्मी या गर्म झोंके के प्रभाव को कम करें।

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