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Thursday, July 18, 2024

40 फार्मासिस्टों को नौकरी का इंतजार

कानपुर – डिवीजन बेंच से लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश कर दिया लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने 40 फार्मासिस्टों को नौकरी नहीं दी। वह पांच साल से कोर्ट के चक्कर लगाकर अपनी पूंजी भी गंवा चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने 12 नवंबर 07 को फार्मासिस्टों की नियुक्ति के लिए 700 से ज्यादा पदों के लिए आवेदन मांगे थे। चयन प्रक्रिया का आधार मेरिट व वरिष्ठता क्रम के साथ साक्षात्कार रखा गया। इस पर सर्वेश शुक्ला समेत 178 फार्मासिस्टों ने इसे नियम विपरीत बताकर उच्च न्यायालय में अपील कर दी। हाईकोर्ट के लखनऊ खंडपीठ की डिवीजन बेंच ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद 4 मई 09 को फैसला सुनाते हुए पूर्व नियम के मुताबिक नियुक्ति करने के आदेश जारी कर दिए। सर्वेश के मुताबिक प्रदेश सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। 3 अगस्त 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने भी डिवीजन बेंच के फैसले पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के पैरा 32 में कहा कि आवेदनकर्ताओं को चयन से वंचित नहीं रखा जा सकता है। सर्वेश के मुताबिक इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 128 फार्मासिस्टों को तो नौकरी दे दी लेकिन 40 फार्मासिस्ट अभी भी नौकरी से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते घर के बर्तन बिक गए। अब नौकरी नहीं मिली तो सड़क पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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