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दालों की कीमतों को कम करने के लिए बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी

नई दिल्ली : देश में दालों की कीमतों को काबू में रखने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम समिति ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. समिति  के अनुसार आने वाले दिनों में दालों की खपत बढ़ेगी. दालों की मांग और आपूर्ति की खाई चौड़ीpulses-seized_5683991601dab होती जाएगी इन चुनौतियों का सामना करने के लिए घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और दालों का समर्थन मूल्य बढाने की जरूरत है.

रिपोर्ट सौंपने के बाद सुब्रह्मण्यम ने कहा कि किसानों को पारंपरिक फसलों की जगह दाल उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. धान के मुकाबले अगर किसान दालों का उत्पादन करता है, तो उसे आर्थिक लाभ भी मिलेगा और पानी जैसे संसाधनों की भी कम जरूरत होगी. किसान दाल उगाने के लिए प्रोत्साहित हों, इसके लिए उन्होंने दालों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की भी अनुशंसा की है.

समिति के अनुसार तुअर दाल का मौजूदा समर्थन मूल्य 52 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो किया जाना चाहिए. इसी तरह उड़द की दाल का समर्थन मूल्य 60 रुपए प्रति किलो और चना का 40 रुपए प्रति किलो किया जाना चाहिए. समिति का साफ कहना है कि अगर दाल की कीमतों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाता है तो इससे महंगाई नहीं बढ़ेगी.

समिति ने दालों की सरकारी खरीद की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सिफारिश की है. समिति का कहना है कि वित्त मंत्री, कृषि मंत्री, उपभोक्ता मामलों के मंत्री और प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सचिव की एक समिति बनाई जाए, जो इस पर लगातार नजर रखे, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि दालों की खरीद जमीन पर भी हो रही है. इसके अलावा दालों के आयात पर प्रतिबंध को पूरी तरह से खत्म करने, 20 लाख टन दाल स्टोर करने की क्षमता भी तैयार करने और खुदरा बाजार में मूल्यों पर नियंत्रण रखने की सिफारिश की गई.

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