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​UPRNN: इंजिनियर और ठेकेदारों के बीच घमासान, दोनों ने एक दूसरे के खिलाफ कराई FRI

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में इंजिनियरों और ठेकेदारों के बीच घमासान शुरू हो गया है। सेवा डिवेलपर्स के निदेशकों ने
यूपीआरएनएन

के अधिशाषी अभियंता सत्यवीर सिंह यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। जिसमें उन्होंने इंजिनियर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। वहीं इंजिनियर की तरफ से ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। दोनों के बीच बीते 24 नवंबर को विवाद हुआ था।

दारुलशफा में टाइप 5 आवासीय फ्लैट्स बने हैं। सेवा डिवेलपर्स इस 34 करोड़ के प्रॉजेक्ट पर काम कर रही है। यहां विधायकों और अधिकारियों के लिए फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं।

प्रॉजेक्ट

ढाई साल पहले कंपनी को दिया गया था। कंपनी ने यह प्रॉजेक्ट नवंबर महीने के दूसरे हफ्ते में पूरा कर लिया था।

कंपनी के

निदेशक

शिवराम पाण्डेय ने इंजियर पर उनका भुगतान गैर कानूनी ढंग से रोकने का आरोप लगाया। कंपनी के निदेशक ने बताया कि उन्हें राज्य सरकार की तरफ से अच्छे कार्य के लिए प्रशंसा पत्र दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने यूपीआरएनएन से उनका बकाया भुगतान मांगा तो सत्यवीर सिंह यादव ने उनसे 3.50 करोड़ रुपये कमिशन मांगा।

वहीं सत्यवीर सिंह यादव ने भी हजरतगंज थाने में तहरीर दी है। उन्होंने कंपनी के निदेशक पाण्डेय पर आरोप लगाया है उन्होंने प्रॉजेक्ट में ज्यादा रुपये विभाग से लिए और 57 रुपये धोखे से लिए।

इंजिनियर का आरोप है कि सेवा

डिवेलपर्स

के निदेशक शिवराम पाण्डेय और भरतनाथ शुक्ला ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए विभाग से ज्यादा भुगतान लिया। इसके अलावा इंजिनियर ने दोनों पर सरकारी काम में बाधा डालने की तहरीर भी दी है। दोनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

सत्यवीर ने बताया कि उन्हें कई इंजिनियर का सपोर्ट है। शिवराम पाण्डेय और दूसरे ठेकेदारों ने जो किया उससे सभी नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले उन्होंने इंजिनियर्स को ब्लैकमेल करने का प्रयास किया जब वे सफल नहीं हुए तो उन्होंने फर्जी शिकायत थाने में दर्ज की।

एसएसपी दीपक कुमार ने बताया कि दोनों तरफ से आई तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। सत्यवीर सिंह यादव के खिलाफ विभागीय जांच भी चल रही है। पुलिस उनका पिछला रेकॉर्ड भी जांचेगी। कुछ

इंजिनियर्स

का कहना है कि उनके पास शिवराम पाण्डेय के खिलाफ कुछ सबूत हैं। सभी तथ्यों और सबूतों की जांच करने के बाद मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।

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