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​शौचालय के नाम पर करोड़ों खर्च मगर…

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लखनऊ-दीपक ठाकुर:NOI।

हमारी केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार स्वक्षता को लेकर कितनी गंभीर है इसका नज़ारा आपको टेलीविजन और अखबारों पर उसके विज्ञापन से पता चल ही जाता होगा कितना पैसा इन विज्ञापनों में खर्च किया जाता है इसका भी आप अंदाजा भर ही लगा सकते हैं मगर ये सरकारें क्या ज़मीनी तौर पर भी शौचालय को लेकर संवेदनशील है ये एक बड़ा सवाल है वो इस लिए के हमारे क्षेत्र में जो सरकारी सुलभ शौचालय बने है उनकी तस्वीर कमोबेश कुछ एक सी ही दिखाई पड़ती है जिससे उन लोगो के स्वास्थ पर बुरा  असर पड़ता है जिनके क्षेत्र में ये निर्मित होता है।

ये जिस सुलभ शौचालय की तस्वीर आपको दिखाई दे रही है ये राजधानी लखनऊ के ठाकुर गंज क्षेत्र की है इसका निर्माण काफी वर्षो पहले इसी उद्देश्य से किया गया था कि इससे यहां या यहां से गुजरने वाले लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी।मगर इसके हालात दिन ब दिन बुरे ही होते जा रहे हैं जो आपको तस्वीर देख कर मालूम ही पड़ रहा होगा।

यहां इस सुलभ शौचालय के बाहर ही लोग मल मूत्र कर के बेरोकटोक चले जाते हैं जिससे गंदगी जमा रहती है जो आगे चलकर बीमारी को दावत देने का काम करती है उनका बाहर ही इसका प्रयोग करना उनकी मजबूरी भी है क्योंकि अंदर के हालात तो दिखाने लायक नही लगते आप खुद ही समझ गए होंगे।

अभी हाल ही में जब सरकार सुलभ शौचालय को लेकर काफी तीव्र रुख अपनाए हुए थी उस वक़्त यहां सर्वे टीम आई हुई थी उन्होंने अपनी नाक पर कपड़ा डाल के सारा जायज़ा तो ले लिया पर यहां की दशा सुधारने की अभी तक कोई पहल नही की घनी आबादी के बीच बना ये सुलभ लोगों के जीवन के लिए दुर्लभ होता जा रहा है जिसके लिए ज़िम्मेदार लोगो को कुछ करने की ज़रूरत है।

विज्ञापनों में करोङो खर्च करने से अच्छा तो यही होगा कि जो है उसी पर पैसा खर्च किया जाए सभी सुलभ शौचालयों की समीक्षा कर उनका जीर्णोद्धार किया जाए तभी तो लोग भी इसका इस्तेमाल करने में गुरेज़ नही करेंगे लेकिन अगर ऐसा ही आपका रुख रहा तो वो दिन दूर नही जब लोग खुद ही इसको हटवाने के लिए लामबंद दिखाई देंगे।

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