आर्मी चीफ बिपिन रावत के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और बांग्लादेशी शरणार्थियों पर दिए बयान पर विवाद बढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि राजनीतिक दलों पर स्टेटमेंट देना आर्मी चीफ का काम नहीं है। उधर, बीजेपी और कांग्रेस ने कहा कि आर्मी चीफ के बयान पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने असम के हालात को देखते हुए यह बात कही। इस बीच आर्मी ने बिपिन रावत के बयान को सही बताया है। बता दें कि उन्होंने बुधवार को कहा था कि वोट बैंक की राजनीति के चलते ही एआईयूडीएफ संगठन असम में बीजेपी से बहुत तेजी से बढ़ा है।
बदरुद्दीन अजमल ने किया पलटवार
– AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि आर्मी चीफ का बयान राजनीतिक है। उन्होंने कहा कि रावत को एक राजनीतिक पार्टी (जो तेजी से ग्रोथ कर रही है) पर चिंता करने की क्या जरूरत है? AIUDF और AAP जैसी पार्टियों का बढ़ना बड़ी पार्टियों की मिस गवर्नेस का नतीजा है।
– ‘अगर कुछ भी राजनीतिक नहीं है तो आर्मी चीफ अपनी स्पीच में एक राजनीतिक पार्टी को क्यों लाए? जिसके प्रतिनिधियों को भारतीय जनता ने लोकतांत्रिक रूप से चुना हो।’आर्मी ने बिपिन रावत के बयान को सही ठहराया
– आर्मी ने विवाद बढ़ने के बाद बिपिन रावत के बयान का सही बताया है। आर्मी ने कहा कि उनके बयान में कुछ भी राजनीति नहीं है और ना ही यह किसी धर्म से जुड़ा है। वहीं, बीजेपी और कांग्रेस का कहना है कि किसी पार्टी को आर्मी चीफ के बयान पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
– अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सेना पर बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। ओवैसी को बेवजह बयान देने की आदत है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने कहा कि आर्मी चीफ ने समस्या के बारे में जानकारी दी है। इस पर विवाद नहीं होना चाहिए।

ओवैसी ने कहा – उन्हें ऐसे बयानों से दूर रहना चाहिए
– एआईएमआईएम के ओवैसी ने आर्मी चीफ के बयान पर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि आर्मी चीफ को इस तरह से किसी राजनीतिक पार्टी के विकास पर सवाल खड़ा करने की इजाजत लोकतंत्र और संविधान नहीं देता। उन्हें ऐसे बयानों से बचना चाहिए। आर्मी चुनी हुई लीडरशिप के तहत काम करती है।बिपिन रावत ने क्या कहा था?
– पूर्वोत्तर सीमा सुरक्षा को लेकर दिल्ली में हुए एक सेमिनार में आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा- “असम में एक पार्टी AIUDF है। अगर आप देखें तो जिस तरह से बीजेपी 1984 में 2 सीटों से बढ़कर आज यहां तक पहुंची है। उससे ज्यादा तेजी से यह पार्टी बढ़ी है।”
– इस दौरान उन्होंने मुस्लिमों की आबादी को लेकर बनी एक रिपोर्ट का हवाला भी दिया। कुछ इलाकों में शरणार्थियों की तादाद तेजी से बढ़ रही है। सरकार नॉर्थईस्ट पर ध्यान दे रही है। वहां विकास किया जाएगा। उस क्षेत्र में रहने वाले हर शख्स का हम सम्मान करते हैं, चाहें वे किसी जाति, धर्म और लिंग के हों। सबसे अच्छा तरीका तो ये है कि वहां रहने वाले लोगों को अन्य भागों में रहने वाले लोगों से जोड़ा जाए और फिर विकास किया जाए।”प्रॉक्सी वॉर छेड़े हुए है पड़ोसी
– बिपिन रावत ने कहा- “हमने वहां कुछ लोगों की पहचान की है, जो परेशानी पैदा कर रहे हैं। वो अवैध शरणार्थी भी हो सकते हैं। असम में बाहर से मुस्लिम आबादी बड़ी तादाद में आ रही है। ये लोग काफी पहले ही आ चुके हैं। ये लोग अब असम और नॉर्थईस्ट के इलाकों पर भी दावा करने लगे हैं।”
– “बांग्लादेश से लगातार माइग्रेशन हो रहा है। बांग्लादेश से लोगों के आने की 2 वजहें हैं- एक, वहां रहने की जगह की कमी है। दूसरा- मानसून के दौरान वहां एक बड़ा हिस्सा पानी में डूबा रहता है।”
– “एक और मुद्दा है- प्लान्ड माइग्रेशन हो रहा है। इस माइग्रेशन की वजह हमारा पश्चिमी इलाके का पड़ोसी (पाक) है। इसके जरिए वह एक प्रॉक्सी वॉर छेड़े हुए है। इसमें हमारे उत्तरी इलाके का पड़ोसी (चीन) इसमें मदद कर रहा है। माइग्रेशन के चलते पूरे इलाके में समस्या बनी हुई है।”एआईयूडीएफ ने कहा- हमारी पार्टी गरीबों के लिए काम काम करती है
– एआईयूडीएफ के विधायक अमीनुल इस्लाम ने ने कहा- “हमारी पार्टी गरीबों के लिए काम कर रही है। इसलिए हमारी पार्टी ने राज्य में बीजेपी से ज्यादा और तेजी से लोगों के बीच पैठ बनाई। असम की जनता धर्म और जाति से हटकर राजनीति करने की वजह से हमें पसंद कर रही है। हम जल्द ही राज्य में सरकार बनाएंगे।”एआईयूडीएफ ने असम में बनाई पैठ
– ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) संगठन 2005 में बना था। इसके चीफ बदरुद्दीन अजमल हैं। वे धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं। इस संगठन के राज्य में 13 विधायक हैं। वहीं, 3 सांसद भी हैं। इस संगठन को बांग्लादेशी शरणार्थियों का समर्थन प्राप्त है।
– अजमल पहले इत्र का कारोबार करते थे। फिलहाल उनकी पार्टी राज्य में दूसरे नंबर की बड़ी पार्टी बन गई है।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.