जादुई आंकड़े से दूर पर…

दीपक ठाकुर:NOI।

कर्नाटक में सत्ता के लिए मची उठापटक पर विराम लगने के संकेत मिल गए हैं सूत्रों की माने तो राज्यपाल महोदय सबसे बड़े दल यानी भाजपा को सरकार बनाने का न्योता पहले दे रहे हैं जबकि कर्नाटक में दूसरे बड़े दल कांग्रेस और जेडीएस के समर्थन को फिलहाल ब्रेक लगा दी है।

आज मतों की गिनती शुरू होते होते लग रहा था कि कर्नाटक में भाजपा और कांग्रेस की कांटे की टक्कर रहेगी पर दिन चढ़ते चढ़ते हालात में बदलाव आया और सीटों की गिनती में भाजपा ने कांग्रेस को पछाड़ दिया और सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई लेकिन फिर भी बहुमत से दूर रह गई।

अब बात आती है कि कर्नाटक की कुर्सी पर कौन काबिज़ होगा इसकी उठापटक भी खूब हुई कोई दल सिद्धांत और नैतिकता का हवाला देता नज़र आया तो कोई समर्थन पत्र को लेकर अपने को दावेदार बताने में जुटा रहा।फिर गेंद आई राज्यपाल महोदय के पाले में यहां एक बात तो तय है कि जो पहले आया वही सत्ता संभलेगा क्योंकि यहां इधर से उधर जाने में ना वक़्त लगता है ना ही किसी को कोई संकोच होता है क्योंकि लाभ किसको नही भाता है।

लेकिन एक बात यहां जो भाजपा के लिए चुभने वाली है वो ये के अभी हाल ही में दो राज्यों में हुए चुनाव में भाजपा नम्बर दो की पार्टी तो रही पर आज वहां वो सरकार में है यहां वही हुआ जो भाजपा चाहती थी अब लगता है कि इसी तर्ज पे कर्नाटक में भी वही होगा जो भाजपा चाहेगी।

कांग्रेस बार बार इस बात की दुहाई दे रहा है कि उनका और जेडीएस का गठबंधन सरकार बनाने को तैयार है जो संवैधानिक भी है वही उसका ये भी कहना है कि भाजपा को पहले बुलाना खरीद फरोख्त को बढ़ावा देना साबित होगा।खैर दावा कुछ भी हो पर जो संकेत मिल रहे हैं वो भाजपा के लिए शुभ संकेत वाले दिख रहे हैं वही कांग्रेस और जेडीएस के लिए निराशा भरे।अब सबकी नजर राज्यपाल महोदय की तरफ है देखना ये है कि यहां कुछ नया होगा या इतिहास फिर खुद को दोहराएगा।

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