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Thursday, September 29, 2022

पसमांदा मुसलमानों ने काली पट्टी बाँधकर किया कांग्रेस पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को लिखा पत्र

लखनऊ। पसमांदा मुसलमानों के द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के लिखे गए में कहा गया है कि काँग्रेस पार्टी द्वारा 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा एक अध्यादेश जारी करके देश के पसमांदा मुसलमानों को दलित आरक्षण के लाभ से वंचित कर दिया था। इसके विरोध में बुधवार को पसमांदा मुस्लिम समाज के आह्वान पर उत्तर प्रदेश सहित देश भर के लाखों पसमांदा मुसलमानों ने काली पट्टी बाँध कर कांग्रेस पार्टी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

लखनऊ के प्रेस क्लब में काँग्रेस पार्टी की पसमांदा मुसलमानों के खिलाफ जनता तक पहुँचाने के लिए सेमिनार व प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व राज्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार अनीस मंसूरी मौजूद रहे।

प्रेस को संबोधित करते हुए अनीस मंसूरी ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज अपने स्थापना दिवस से ही धारा 341 के पैरा 3 पर धार्मिक प्रतिबंध लगाने का विरोध करता आया है। इस प्रतिबंध के शिकार सिक्ख, बौद्ध, ईसाई, और मुसलमान हुए। सिक्खों को 1960 और बौद्धों को 1990 में आरक्षण को बहाल कर दिया गया जबकि मुसलमानों और ईसाइयों को आज तक आरक्षण से वंचित रखा।

उन्होंने कहा कि 10 अगस्त 1950 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मुसलमानों को आरक्षण से वंचित करने के लिए राष्ट्रपति अध्यादेश लाकर धारा 341 के पैरा 3 पर धार्मिक प्रतिबंध लगा कर पिछड़े मुसलमानों को आरक्षण से वंचित कर दिया। आजा़द भारत की यह सबसे बड़ी घटना थी जिसने पसमांदा मुसलमानों को जीवन यापन करने पर मजबूर कर दिया।

काँग्रेस ने धारा 341 के पैरा 3 पर धार्मिक प्रतिबंध लगा कर पिछड़े व दलित मुसलमानों को आरक्षण से वंचित किया है। केन्द्र सरकार को चाहिए कि धारा 341 के पैरा 3 से धार्मिक प्रतिबंध हटा कर पिछड़े/दलित मुसलमानों को आरक्षण दे। ताकि ईसाइयों और मुसलमानों के सामने काँग्रेस की सच्चाई आ सके। हम पसमांदा तबके के लोग हर साल की तरह इस साल भी हाथ पर काली पट्टी बाँध कर 10 अगस्त को काला दिवस के रूप में मनायेंगे और जब तक पसमांदा मुसलमानों को उनका आरक्षण का अधिकार नहीं मिल जाता हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री ने अपने हैदराबाद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पसमांदा मुसलमानों को जोड़ने के बयान से हम पसमांदा मुसलमानों को बड़ा बल मिला है। हम पसमांदा मुस्लिम समाज के संगठन के पदाधिकारी आगामी 10 अगस्त को प्रदेश भर के जनपद मुख्यालयों पर हाथों पर काली पट्टी बांध कर काँग्रेस पार्टी का बड़े स्तर पर विरोध करेंगे और राजधानी लखनऊ के प्रेस क्लब में बड़े पैमाने काँग्रेस पार्टी का विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने प्रस्ताव के तौर पर लिखा किउत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश में कर्पूरी ठाकुर फार्मूला के अनुसार अन्य पिछड़े वर्ग कोटा में अतिपिछड़ा वर्ग के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था लागू किया जाये और पसमांदा (पिछडे़) अधिसूचित मुस्लिम जातियों को प्राथमिकता के आधार पर सबसे ऊपर रखा जाये और खाली जगहों में बैकलॉग के द्वारा भर्ती किया जाये।

औद्योगिकीकरण के चलते पसमांदा मुस्लिम समाज जिसके अन्तर्गत दस्तकार/कारीगर/मज़दूर तबके के लोग आते हैं इनकी बेरोजगारी में इजाफा हुआ है और भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं, नव उदारवादी और अँधाधुंध मशीनीकरण की नीतियों के कारण इन तबकों में बेरोज़गारी बढ़ी है इस सम्बन्ध में लघु उद्योग का विकास ग्रामीण/कस्बा /नगर/ महानगर स्तर पर विकसित किया जाये ताकि दस्तकारों को रोज़गार मिल सके।

दलित मुसलमानों/ ईसाइयों को संविधान की धारा- 341 के 1950 के राष्ट्रपति महोदय के आदेश के पैरा-3 को रद्द करके एससी/एसटी के समान सभी स्तर पर आरक्षण सुनिश्चित किया जाये। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने एक फैसले में कहा है कि जो जातियाँ आरक्षण के द्वारा नौकरियों में अपना 50 प्रतिशत प्राप्त कर चुकी हैं उन्हें ओबीसी आरक्षण से बाहर किया जाना चाहिए।सरकार को इस पर ईमानदारी से काम करना होगा।

अल्पसंख्यकों के विकास हेतु आवंटित बजट का 80 प्रतिशत पसमांदा मुसलमानों के शैक्षिक सामाजिक एवं आर्थिक विकास पर खर्च किया जाना तय किया जाये।पसमांदा मुसलमानों के संरक्षण के लिए एससी, एसटी कानून की भाँति क़ानून बनाना आवश्यक हो गया है। सरकार इस बिंदु पर विचार करे। पसमांदा मुसलमानों के कारोबार पर उचित नीतियां बनायी जानी चाहिए। इनके उत्पाद ब्राण्डेड नहीं होने के कारण एवं बाज़ारीकरण की दौड़ में पिछड़ गये हैं। सरकार को विशेष व्यवसायिक, तकनीकी एवं औद्योगिक प्रशिक्षण देकर इन कामगार तबके को स्किल्ड बनाना होगा। सरकारी उपेक्षा के कारण मुस्लिम वक्फ सम्पत्तियों पर माफियाओं का क़ब्ज़ा होता जा रहा है। खरबों की वक्फ सम्पत्तियाँ बेकार पड़ी हैं। मुसलमानों को वक्फ सम्पत्तियों को जो खरबों रूपये की क़ीमत की हैं पसमांदा मुसलमानों की बेहतरी के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। देशभर के वक्फ बोर्डाे की वक्फ सम्पत्तियों को चिन्हित कर प्रधानमंत्री जीविका योजनानुसार वक्फ विकास निगम से व्यवसायिक रूप से विकसित कराना। पसमांदा मुसलमानों को मोस्ट बैकवर्ड क्लास का दर्जा दिया जाय।

संसाधन सीमित हैं इसलिए पसमांदा मुसलमानों को कारोबार के लिीए बैंकों से आसानी से धन उपलब्ध कराया जाए। पसमांदा मुस्लिम समाज आज भी मुफ्त राशन, अवास, और शौचालय बिना भेदभाव के मिलने के कारण बड़ी तादाद में भाजपा को मतदान करता है इसलिए उनके उत्थान हेतु विशेष कार्य योजना बना कर लाभान्वित किया जाना चाहिए।

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