कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की आहट….

संपादकीय

कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर के मामले लगातार अब घट रहे हैं।वहीं उपचाराधीन मामलों में भी घटोतरी है। आज सैंतीस हजार नए मामले आये हैं। वहीं 24 अगस्त को पच्चीस हजार मामले आये थे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो हम जल्दी ही संक्रमण के खतरे से बाहर आ सकते हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि जब प्रतिदिन के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव होता है तो लगता है कि खतरा अभी टला नहीं है।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि महामारी अभी गई नहीं, सिर्फ तीव्रता में कमी आई है। अभी उतार चढ़ाव जारी है। ऐसा इसलिए भी है कि केरल जैसे कुछ राज्यों में स्थिति बेकाबू तो नहीं है, पर खतरे से बाहर भी नहीं कही जा सकती। इसलिए कोरोना को लेकर अभी भी सतर्कता की बेहद जरूरत है। दरअसल, कामधंधों की चिंता में देश के ज्यादातर हिस्सों में जनजीवन सामान्य करना पड़ा है। दफ्तरों से लेकर स्कूल-कालेज, बाजार, सिनेमाघर, जिम, तरणताल सब खोलने पड़े हैं। इसलिए अब अतिरिक्त सावधानी के साथ ही बढ़ने पर जोर होना चाहिए।

देश के प्रधानमंत्री में कोरोना की तीसरी लहर की आहट में मंगलवार को बैठक भी बुला चुके हैं। अब आगे का सवाल यह है कि तीसरी लहर का खतरा कितना है, और तीसरी लहर आएगी भी या नहीं?हालांकि, तीसरी लहर को लेकर विशेषज्ञ तो बार-बार चेता ही रहे हैं। मसलन हाल ही में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की एक समिति ने भी तीसरी लहर को लेकर चेतावनी जारी की है। समिति का मानना है कि अक्तूबर के आखिरी हफ्ते में कोरोना पीक पर होने का अंदेशा जताया है। गौरतलब है कि दूसरी लहर में डेल्टा स्वरूप ने कहर बरपाया।

मुश्किल तो अब यह है कि हाल में संक्रमण के मामलों में तेजी उन राज्यों में देखने को मिली है। जहां मई में दूसरी लहर के दौरान संक्रमण बुहत ज्यादा नहीं फैला था। अब इस वक्त सबसे ज्यादा संकट केरल में हैं, जहां रोजाना संक्रमण के नए मामले देश के अन्य राज्यों से ज्यादा आ रहे हैं।

वहीं, दूसरे नबंर पर महाराष्ट्र है। जबकि कोरोना से मौतों के मामले में महाराष्ट्र पहले नबंर पर और केरल दूसरे पर है। पूर्वोत्तर की ओर देखें तो मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश के आंकड़े भी कम चिंता पैदा करने वाले नहीं हैं। इसलिए विशेषज्ञों का अनुमान कह रहा है कि तीसरी लहर का खतरा वहां ज्यादा है जहां पहले कोरोना के डेल्टा रूप ने कहर नहीं ढहाया। यही खतरा अब बड़ी चुनौती बन कर सामने है।

हम सभी लोगों को भूलना नहीं चाहिए कि हम महामारी की दो लहरें झेल चुके हैं। दूसरी लहर में संक्रमण और मौतों के आंकड़े ने भारत को दुनिया के पहले दो देशों में खड़ा कर दिया था। इसलिए अगर तीसरी लहर में हालात बेकाबू होते हैं तो यह कह कर नहीं बचा सकेगा कि हमें हालात से निपटने का अंदाजा नहीं था।

बेशक पहली लहर के वक्त हमें कुछ पता नहीं था, पर दूसरी लहर ने हमें काफी कुछ सिखाया। तीसरी लहर से निपटने के लिए ज्यादातर राज्य अब अस्पतालों में बिस्तरों, चिकित्साकर्मियों से लेकर ऑक्सीजन का बंदोबस्त करने का दावा कर रहे हैं। लेकिन लोग न तो टीकाकरण में रुचि दिखा रहे है , न ही सामाजिक दूरी और मास्क का प्रयोग कर रहे है। जबकि तीसरी लहर को रोकने का यही एक बड़ा जरिया है।
विनीत तिवारी, लखनऊ

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