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Wednesday, July 17, 2024

साइकिल की ज़िद!


लखनऊ, दीपक ठाकुर। उत्तर प्रदेश में चुनावी दंगल का बिगुल बज चुका है पर अभी तक समाजवादी पार्टी की साईकिल किसके पास रहेगी ये फैसला नहीं हो पाया है हालांकि फैसले पर अंतिम मुहर तो चुनाव आयोग की होगी पर जिस तरह से पार्टी में आये दिन बचकानी हरकते सुनने या देखने को मिल रही है उससे तो यही लगता है कि शायद इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब बच्चे द्वारा साईकिल की मांग को उसके पिता जी नज़रंदाज़ करेंगे वो भी इस हद तक की फैसला कोई और करेगा की साईकिल बेटे को दें या पिता के पास ही रहने दी जाए।

समाजवादी पार्टी में नेता लोग भले ये बात कहें कि यहाँ सब ठीक है सब साथ साथ है पर ये बात लोगों के गले नहीं उतर रही वो यही सोच रहे हैं कि ये कैसा साथ जहाँ हर बात पे तकरार।

राम गोपाल जी पार्टी द्वारा महाधिवेशन बुला कर मुख्य मंत्री को राष्ट्रीय अध्यक्छ घोषित करते हैं तो पापा कहते हैं कि वो तो मैं हूँ और मेरी अनुमति के बिना कैसे कोई और मुझे हटा सकता है जबकि राम गोपाल को मैं पहले ही निकाल चूका हूँ। बड़ी अजीब सी बातें हो रही है पिछले कई दिनों से पार्टी के अंदर पार्टी दो फाड़ में बट गई है ये बात तो तय है क्योंकि किसी को कोई पसंद नहीं तो किसी को कोई किसी की आँख का तारा जो है वो दूसरे की आँख की किरकिरी बन गया है कोई आफिस की नेम प्लेट हटा रहा है तो कोई ताला लटका के जा रहा है। 

सवाल आखिर यही है कि जब सब ठीक ही है तो ये आये दिन नया घटना क्रम क्यों हो रहा है क्या धर्म नीति पर राजनीति हावी हो रही है क्योंकि धर्म नीति तो यही कहती है कि जब बेटा काबिल हो जाये तो पिता को सब त्याग कर उसको दे देना चाहिए और खुद चैन से रहना चाहिए पर शायद राजनीति ये सिखाती है कि जब तक है दम लड़ते रहेंगे हम।।

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